जमशेदपुर ट्रिपल मर्डर: पत्नी पर तीन, बेटे पर दो और गर्भवती बेटी पर किया एक घातक वार; थाने में बड़े बेटे को देख रो पड़ा कातिल पिता

जमशेदपुर:सिदगोड़ा के एग्रिको क्वार्टर में हुए तिहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपी के बयानों के आधार पर हत्या के क्रम का खुलासा किया है। टाटा स्टील के पूर्व कर्मचारी रविंद्र सिंह ने जिस बेरहमी से अपने ही परिवार को खत्म किया, उसके पीछे ‘डिप्रेशन’ और ‘आर्थिक तनाव’ की कहानी सामने आई है।

हथौड़े से किया वार: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा

पुलिस जांच के अनुसार, रविंद्र सिंह ने भारी हथौड़े का इस्तेमाल कर सोचे-समझे तरीके से तीनों की जान ली जिसमें पत्नी (सरिता सिंह) सबसे पहले किचन में उन पर हमला हुआ। उनके सिर के बाएं हिस्से, गाल और कलाई पर 3 गहरे वार किए गए।छोटा बेटा (रविशेक सिंह) के सिर और ललाट पर 2 बार प्रहार किया गया।गर्भवती बेटी (सुप्रिया सिंह) पर 1 जोरदार वार किया गया, जिससे उसकी और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई।

“तुम यहाँ से चले जाओ”: बड़े बेटे से मिल फूट-फूट कर रोया आरोपी

मंगलवार सुबह जब आरोपी का बड़ा बेटा अभिषेक सिंह रायपुर से जमशेदपुर पहुँचा और सिदगोड़ा थाने में अपने पिता से मिला, तो एक अजीब दृश्य देखने को मिला।अपने बड़े बेटे को देखते ही कातिल पिता रविंद्र सिंह फफक-फफक कर रो पड़ा। उसने रोते हुए बेटे से कहा, “तुम यहाँ से चले जाओ।” बातचीत में उसने बताया कि रिटायरमेंट के बाद नया मकान बनाने का दबाव, आर्थिक तंगी और छोटे बेटे की शादी की चिंता ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था, जिसके चलते उसने आपा खो दिया।

एक ही चिता पर पंचतत्व में विलीन हुआ परिवार

मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद तीनों शवों को परिजनों को सौंप दिया गया। भुइयांडीह स्थित श्मशान घाट पर एक साथ तीनों का अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे अभिषेक ने अपने ही हाथों अपनी माँ और भाई-बहन को मुखाग्नि दी। इस हृदयविदारक दृश्य को देख वहां मौजूद हर आंख नम थी।

कानूनी कार्रवाई और आत्महत्या का प्रयास

पुलिस ने बताया कि आरोपी रविंद्र सिंह ने हत्या के बाद खुद भी आत्महत्या की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। सिदगोड़ा पुलिस ने हत्या की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। आरोपी को मेडिकल जांच के बाद जेल भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है।यह घटना समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि कैसे अनकहा मानसिक तनाव और अवसाद एक हंसते-खेलते परिवार को श्मशान में बदल सकता है। आर्थिक चिंताओं के बोझ तले दबे रविंद्र सिंह ने न केवल अपनों को खोया, बल्कि अपने जीवन को भी कालिख से भर लिया।

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