जमशेदपुर: शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा देने के उद्देश्य से टाटा स्टील यूआईएसएल ने ‘प्रकृति स्नेह कम्पोस्ट’ नामक जैविक खाद को लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य शहरी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
रोजाना 120 टन जैविक कचरे का होगा प्रसंस्करण
कंपनी अधिकारियों के अनुसार, जमशेदपुर से प्रतिदिन लगभग 300 टन शहरी कचरा निकलता है। इसमें से करीब 120 टन जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर जैविक खाद तैयार की जा रही है। इसी खाद को ‘प्रकृति स्नेह कम्पोस्ट’ नाम दिया गया है, जो कृषि, बागवानी और पौधारोपण के लिए उपयोगी साबित होगी।
शेष 180 टन कचरे के निस्तारण की भी तैयारी
अधिकारियों ने बताया कि शहर से निकलने वाले शेष 180 टन कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए भी व्यापक योजना पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
स्वच्छ शहर और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
टाटा स्टील यूआईएसएल का मानना है कि कचरे को संसाधन में बदलने की यह पहल शहर को स्वच्छ बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कंपनी ने नागरिकों से घरों में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने तथा स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है।
रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता होगी कम
विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक कचरे से तैयार कम्पोस्ट के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, फसलों की गुणवत्ता बेहतर होगी और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचेगा। ‘प्रकृति स्नेह कम्पोस्ट’ को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल माना जा रहा है।
शहर में अपशिष्ट प्रबंधन का नया मॉडल
‘प्रकृति स्नेह कम्पोस्ट’ परियोजना जमशेदपुर में अपशिष्ट प्रबंधन का एक नया मॉडल बन सकती है। यदि नागरिक भी कचरा पृथक्करण की प्रक्रिया में सहयोग करें तो शहर को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाने का लक्ष्य और तेजी से हासिल किया जा सकेगा।
