जमशेदपुर: सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का निबंधन रद्द कराने की कोशिश में बड़ा झटका लगा है। साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के निबंधन संख्या 33/2015-16 को लेकर प्राप्त शिकायत और उसके आधार पर की गई विभागीय संयुक्त जांच के बाद प्रस्तुत प्रतिवेदन में कमेटी की स्वतंत्र एवं पृथक वैधानिक स्थिति को स्वीकार किया गया है।निबंधन विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, साकची को एक अलग और स्वतंत्र रूप से पंजीकृत धार्मिक संस्था माना गया है। रिपोर्ट के बाद साकची गुरुद्वारा के निबंधन को अवैध ठहराने की मांग को मजबूत आधार नहीं मिला।


संयुक्त जांच रिपोर्ट ने साकची गुरुद्वारा के पक्ष को किया मजबूत
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, साकची के स्वतंत्र अस्तित्व और उसके विधिक अधिकारों को लेकर उठाए गए सवालों के बीच निबंधन कार्यालयों के निरीक्षक, कोल्हान प्रमंडल और सहायक निबंधन महानिरीक्षक की संयुक्त जांच रिपोर्ट ने साकची गुरुद्वारा के पक्ष को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया है।संयुक्त जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, साकची एक स्वतंत्र रूप से निबंधित संस्था है और उसका संविधान एवं उपनियम विधिक रूप से प्रभावी हैं।रिपोर्ट के अनुसार किसी अन्य संस्था द्वारा अपने नियमों के आधार पर साकची गुरुद्वारा की वैधानिक स्थिति को चुनौती नहीं दी जा सकती।
प्रधान निशान सिंह और अधिवक्ता केएम सिंह ने की प्रेस वार्ता
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, साकची के प्रधान सरदार निशान सिंह और जमशेदपुर न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता केएम सिंह ने प्रेस वार्ता कर संयुक्त जांच प्रतिवेदन को सार्वजनिक किया।अधिवक्ता केएम सिंह ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान दोनों पक्षों को सुना गया और संबंधित दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का परीक्षण किया गया।उन्होंने कहा कि जांच के निष्कर्ष साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के स्वतंत्र संवैधानिक और वैधानिक अस्तित्व को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
निशान सिंह बोले- सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं
साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान निशान सिंह ने संयुक्त जांच रिपोर्ट को संघर्ष की जीत बताया। उन्होंने कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं।”उन्होंने इसे पूरे सिख समाज की जीत बताया और कहा कि रिपोर्ट ने साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के स्वतंत्र अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों को महत्वपूर्ण आधार दिया है।
सीजीपीसी ने निबंधन और उपनियम संशोधन पर उठाए थे सवाल
सीजीपीसी की ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2015-16 में साकची गुरुद्वारा प्रबंधन ने उसे विश्वास में लिए बिना निबंधन कराया और उपनियमों में संशोधन किया।संयुक्त जांच समिति ने इस मामले में नियमों और दस्तावेजों का परीक्षण किया। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि यदि किसी संस्था के संशोधित उपनियम विभागीय पोर्टल पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप अपलोड नहीं किए गए हैं, तो उन्हें संबंधित संस्था के विधिवत बाई-लॉ का हिस्सा नहीं माना जा सकता।इस निष्कर्ष के बाद शिकायत के प्रमुख आधारों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
किसी अन्य संस्था के नियमों से प्रभावित नहीं होगी साकची गुरुद्वारा की वैधानिक स्थिति
जांच रिपोर्ट के अनुसार गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, साकची एक स्वतंत्र रूप से निबंधित संस्था है। ऐसे में कोई अन्य स्वतंत्र संस्था, चाहे वह सीजीपीसी ही क्यों न हो, अपने नियमों या संशोधनों के आधार पर साकची गुरुद्वारा के निबंधन अथवा उसकी वैधानिक स्थिति को प्रभावित नहीं कर सकती।रिपोर्ट में कहा गया है कि साकची गुरुद्वारा का स्वतंत्र संविधान विधिक रूप से प्रभावी है और उसकी वैधता किसी अन्य संस्था के दावे या निर्णय से समाप्त नहीं की जा सकती।
पुराने नियम प्रभावी करने के लिए सीजीपीसी को अपनानी होगी वैधानिक प्रक्रिया
संयुक्त जांच प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपने पुराने जनरल बोर्ड से पारित नियमों अथवा संशोधनों को प्रभावी बनाना चाहती है, तो उसे निबंधन विभाग के समक्ष निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।इसके लिए संबंधित बाई-लॉ में आवश्यक संशोधन कराना होगा। केवल दावा करने मात्र से ऐसे नियम प्रभावी नहीं माने जा सकते।
संपत्ति और नियंत्रण से जुड़े विवादों के लिए सिविल कोर्ट उचित मंच
जांच प्रतिवेदन में संस्था की परिसंपत्तियों और नियंत्रण से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया गया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के अधिकार संबंधी विवादों का निस्तारण निबंधन विभाग के स्तर पर नहीं, बल्कि सक्षम व्यवहार न्यायालय यानी सिविल कोर्ट के माध्यम से किया जाना चाहिए।
25 मार्च 2026 को दोनों पक्षों की हुई थी सुनवाई
रिपोर्ट के अनुसार उप निबंधन महानिरीक्षक के निर्देश पर दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना गया। 25 मार्च 2026 को आयोजित सुनवाई में दोनों पक्ष उपस्थित हुए और उन्होंने लिखित एवं मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए।शिकायतकर्ता की ओर से वर्ष 2003 के जनरल बोर्ड द्वारा पारित बताए गए नियम और उपनियम भी संयुक्त जांच समिति के समक्ष रखे गए थे। इन दस्तावेजों की जांच और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद समिति ने अपना अंतिम निष्कर्ष तैयार किया।
साकची गुरुद्वारा कमेटी के स्वतंत्र अस्तित्व को मिला महत्वपूर्ण आधार
संयुक्त जांच रिपोर्ट ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, साकची के स्वतंत्र संवैधानिक अस्तित्व और विधिक वैधता को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया है। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।हालांकि, संपत्ति, नियंत्रण या अधिकार से जुड़े किसी भी विवाद का अंतिम निस्तारण सक्षम न्यायालय के समक्ष किया जा सकता है।
