जमशेदपुर। नेचर संस्था द्वारा संचालित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत इतिहास विषय की छात्राओं का शैक्षणिक भ्रमण ट्राइबल कल्चर सेंटर में कराया गया। इस अवसर पर छात्राओं को झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, इतिहास, कला, परंपराओं और जीवन शैली से रूबरू होने का अवसर मिला।
आदिवासी समाज की विरासत और परंपराओं से कराया परिचय
भ्रमण के दौरान ट्राइबल कल्चर सेंटर के विशेषज्ञ राकेश सिंह ने छात्राओं को झारखंड की विभिन्न जनजातियों की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और दैनिक जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आदिवासी समुदायों की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, लोकनृत्य, लोकसंगीत और मनोरंजन के विविध स्वरूपों पर भी प्रकाश डाला।संग्रहालय में प्रदर्शित दुर्लभ वस्तुओं, पारंपरिक वेशभूषा, कृषि उपकरणों, संगीत वाद्यों और सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से छात्राओं को जनजातीय जीवन को नजदीक से समझने का अवसर मिला।
आदिवासी संस्कृति प्रकृति और सामुदायिक जीवन से जुड़ी
राकेश सिंह ने कहा कि झारखंड की आदिवासी संस्कृति केवल इतिहास की धरोहर नहीं है, बल्कि आज भी यह प्रकृति, सामुदायिक जीवन और पारंपरिक ज्ञान के साथ गहरे संबंधों को जीवित रखे हुए है। उन्होंने छात्राओं को आदिवासी समाज के इतिहास, उनके संघर्षों और राज्य के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान की जानकारी भी दी।
छात्राओं ने पूछे कई सवाल
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्राओं ने संग्रहालय में प्रदर्शित विभिन्न वस्तुओं और आदिवासी संस्कृति से जुड़े विषयों पर अनेक प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने उनके सभी सवालों का विस्तार से उत्तर दिया। छात्राओं ने कहा कि इस भ्रमण से उन्हें पाठ्यपुस्तकों से परे जाकर झारखंड की जनजातीय विरासत को समझने का व्यावहारिक अवसर मिला।
अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा दे रही नेचर संस्था
नेचर संस्था की मेंटर डॉ. कविता परमार और डॉ. विनीता परमार ने बताया कि इंटर्नशिप कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को अनुभवात्मक अधिगम से जोड़ना और उन्हें स्थानीय इतिहास, संस्कृति एवं समाज के प्रति संवेदनशील बनाना है।उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फील्ड विजिट विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उनके शोध, विश्लेषण और लेखन कौशल के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिक्षा और संस्कृति के बीच सेतु बना शैक्षणिक भ्रमण
नेचर संस्था द्वारा आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण छात्राओं के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी साबित हुआ।
