गिरिडीह : गिरिडीह जिले के गावां प्रखंड अंतर्गत बिरने गांव के रविदास टोला में मंगलवार को इतिहास रच गया। गांव के पहले ‘अग्निवीर’ उदय दास अपनी कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी कर जब पहली बार भारतीय सेना की गौरवशाली वर्दी पहनकर अपने पैतृक घर पहुंचे, तो पूरा इलाका उत्सव के माहौल में डूब गया। अपने माटी के लाल को सेना की वर्दी में देखने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हजारों ग्रामीणों का हुजूम सड़कों पर उतर आया और उनके स्वागत में एक ऐतिहासिक व भव्य विजय जुलूस निकाला गया।
1300 की आबादी वाले गांव का टूटा सालों का सूखा
बिरने गांव का रविदास टोला आजादी के बाद से अब तक भारतीय सेना में प्रतिनिधित्व से अछूता था। करीब 1300 की आबादी वाले इस गांव से आज तक कोई भी युवक सेना का हिस्सा नहीं बन पाया था। रविदास टोला निवासी हीराल दास के होनहार पुत्र उदय दास ने इस मिथक और सूखे को तोड़ते हुए गांव के पहले सैनिक (अग्निवीर) के रूप में अपना चयन पक्का किया।गांव की सीमा में प्रवेश करते ही ग्रामीणों ने उदय को कंधों पर उठा लिया और फूलों के हारों से लाद दिया। सबसे खूबसूरत नजारा तब दिखा जब गांव के नन्हे-मुन्ने बच्चे कतार में खड़े होकर सेना की वर्दी पहने उदय दास को पूरी शिष्टता के साथ ‘सैल्यूट’ (सलामी) ठोकते नजर आए।
हाथ में तिरंगा, डीजे की धुन और देशभक्ति के नारे
उदय दास के स्वागत के लिए ग्रामीणों ने एक बड़े वाहन को फूलों से सजाया था। उस खुले वाहन पर हाथ में शान से लहराता राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) थामे उदय खड़े थे और हाथ जोड़कर तथा हाथ हिलाकर अपने अभिभावकों व ग्रामीणों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक गाजे-बाजे और डीजे पर बज रहे देशभक्ति गीतों के बीच यह भव्य रैली पूरे बिरने गांव और आस-पास के क्षेत्रों से होकर गुजरी।पूरे रास्ते ‘भारत माता की जय’ और ‘भारतीय सेना जिंदाबाद’ के गगनभेदी नारों से पूरा गावां प्रखंड गुंजायमान रहा।
“बेटे ने नाम रोशन कर दिया” — भावुक हुईं मां निर्मला देवी
बेटे को सेना की वर्दी और कंधों पर देश की सुरक्षा का जिम्मा लिए देख माता-पिता की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। उदय दास की मां निर्मला देवी ने बेहद भावुक होते हुए कहा “मेरे बेटे ने इंडियन आर्मी में जाकर हमारे पूरे परिवार और पूर्वजों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। हमारी खुशी का आज कोई ठिकाना नहीं है। उसने न सिर्फ इस चौखट का, बल्कि पूरे बिरने गांव का नाम रोशन किया है। इस मिट्टी से पहली बार कोई बच्चा देश की सीमा पर बंदूक थामने जा रहा है, एक मां के लिए इससे बड़ा दिन और कोई नहीं हो सकता।”
आने वाली पीढ़ियों के लिए रोल मॉडल बने उदय
जुलूस में शामिल गांव के प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं ने कहा कि उदय दास की यह कामयाबी केवल एक नौकरी मात्र नहीं है, बल्कि इस सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लिए एक वैचारिक क्रांति है। अब तक यहाँ के युवाओं के पास सेना में जाने के लिए कोई लाइव उदाहरण (रोल मॉडल) नहीं था, लेकिन गांव के पहले अग्निवीर के रूप में उदय की यह उपलब्धि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए मिसाल बनेगी और क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को देश सेवा के प्रति प्रेरित करेगी।
