जमशेदपुर: शहर में हत्या, लूट, चेन छिनतई, रंगदारी, हथियारबाजी और नशे से जुड़े बढ़ते आपराधिक मामलों को लेकर झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) ने चिंता जताई है। संगठन के अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से अपराध नियंत्रण के लिए 90 दिनों की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।मनोज मिश्रा ने कहा कि किसी अपराध के बाद केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। पुलिसिंग ऐसी होनी चाहिए कि अपराधियों में कानून का भय पैदा हो और आम लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
जेएचआरसी ने सुझाई तीन चरणों की अपराध नियंत्रण योजना
जेएचआरसी ने अपराध नियंत्रण के लिए तीन चरणों में कार्रवाई की योजना सुझाई है।पहले 30 दिनों में अपराधियों की निगरानी बढ़ाने, अवैध हथियार और नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज करने तथा संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की गई है।60 दिनों के भीतर लंबित गंभीर आपराधिक मामलों की समीक्षा, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है।वहीं, 90 दिनों में थाना-वार अपराध नियंत्रण रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग संगठन ने की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस क्षेत्र में अपराध नियंत्रण को लेकर क्या कार्रवाई हुई और उसके क्या परिणाम सामने आए।
‘केवल तबादला जवाबदेही का विकल्प नहीं’
मनोज मिश्रा ने कहा कि किसी अधिकारी का केवल तबादला कर देना जवाबदेही तय करने का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने डीएसपी, एसपी और एसएसपी स्तर पर अपराध नियंत्रण के परिणामों की समीक्षा किए जाने की मांग की।उन्होंने कहा कि जनता के लिए हर काम की समय-सीमा तय होती है, तो पुलिस के लिए भी अपराध नियंत्रण की डेडलाइन होनी चाहिए।
अपराध नियंत्रण में तय हो स्पष्ट जवाबदेही
जेएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस प्रशासन को अपराध नियंत्रण के लिए स्पष्ट लक्ष्य और समय-सीमा तय करनी चाहिए। इसके आधार पर अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा होनी चाहिए।उन्होंने जोर दिया कि शहर में कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए निगरानी, गश्त, अवैध हथियारों और नशे के खिलाफ कार्रवाई तथा फरार अपराधियों की गिरफ्तारी को प्राथमिकता दी जाए।
