जमशेदपुर: डिमना मध्य विद्यालय में ‘खूनी संघर्ष’ — 8वीं के छात्र को सहपाठियों ने बेल्ट-डंडे से बेरहमी से पीटा, शिक्षक बने रहे मूकदर्शक

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जमशेदपुर: डिमना स्थित डिमना मध्य विद्यालय में बुधवार को स्कूल परिसर के अंदर ही हिंसा की एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक घटना सामने आई है, जहां 8वीं कक्षा के एक छात्र को उसके ही सहपाठियों ने बेरहमी से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस दौरान शिक्षकों के मूकदर्शक बने रहने पर स्कूल प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

बेरहमी से पिटाई और गंभीर चोटें

घायल छात्र की पहचान रौनक मुंडा (पिता: संगीता मुंडा, निवासी मिर्जडीह) के रूप में हुई है।रौनक पर हमला करने वाले उसके सहपाठी राधेश्याम पात्रो, सोमनाथ मार्डी और मानिक कुमार शामिल थे। तीनों छात्रों ने मिलकर रौनक मुंडा को बेल्ट, कड़ा और डंडों से बेरहमी से पीटा।रौनक की माँ, संगीता मुंडा ने बताया कि उनके बेटे के सिर के पीछे बेल्ट के बक्कल और कड़े से गंभीर चोटें आई हैं।

शिक्षकों की संवेदनहीनता और स्थानीय लोगों की तत्परता

यह पूरी घटना विद्यालय परिसर में हुई, जब प्रभारी प्राचार्या रीता देवी सहित 3-4 शिक्षक मौके पर मौजूद थे।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पिटाई होते देख भी किसी भी शिक्षक ने हस्तक्षेप नहीं किया। न ही उन्होंने पुलिस को सूचना दी और न ही घायल छात्र के परिजनों को घटना के बारे में बताया।शिक्षकों की लापरवाही के बीच, स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायल रौनक मुंडा को तुरंत महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया। एमजीएम अस्पताल में रौनक को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है और उसकी गंभीर चोटों की जांच के लिए उसे सीटी स्कैन के लिए भेजा गया है।

पुलिस में मामला दर्ज और राजनीतिक प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद घायल छात्र के परिवार ने पुलिस को मामले की जानकारी दी और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।इस घटना पर युवा जदयू प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य हेमंत पाठक ने कड़ी नाराजगी जाहिर की।विद्यालय परिसर में इस तरह की घटना बेहद शर्मनाक है। शिक्षकों की नैतिकता मर चुकी है, जो छात्रों की पिटाई होते देख भी मूकदर्शक बने रहे। यह विद्यालय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।”उन्होंने आगे घोषणा की कि युवा जदयू कल (गुरुवार) विद्यालय जाकर दोषी छात्रों एवं संवेदनहीन शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की मांग करेगा। यह घटना सरकारी विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही पर बड़े प्रश्नचिह्न लगाती है।

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