
जमशेदपुर: शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में मिलने वाली मुफ्त शिक्षा का मामला एक बार फिर गरमा गया है। जमशेदपुर अभिभावक संघ ने निजी स्कूलों को मिलने वाली बकाया प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान में हो रही देरी पर कड़ा ऐतराज जताया है। संघ ने इस संबंध में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को पत्र लिखकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
25% सीटों पर नामांकन, पर राशि का अता-पता नहीं
नियमों के मुताबिक, निजी स्कूलों को अपनी प्रारंभिक कक्षाओं की 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के तहत आरक्षित रखनी होती हैं। इन बच्चों की पढ़ाई का खर्च सरकार वहन करती है, जिसे प्रतिपूर्ति राशि के रूप में स्कूलों को दिया जाता है। जमशेदपुर अभिभावक संघ के अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि कई सत्रों से स्कूलों को सरकार की ओर से निर्धारित राशि प्राप्त नहीं हुई है।सत्र 2026-27 के नामांकन की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है।बकाया राशि न मिलने से स्कूलों के पास शिक्षकों के वेतन और बिजली-पानी जैसे बुनियादी खर्चों के लिए फंड की कमी हो रही है।
बच्चों की पढ़ाई पर मंडराया संकट
डॉ. उमेश कुमार ने चिंता जताते हुए कहा कि आर्थिक तंगी के कारण निजी विद्यालय इन बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो स्कूलों का संचालन बाधित होगा, जिसका सीधा असर गरीब परिवारों से आने वाले बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा। उन्होंने जोर दिया कि नियमों के अनुसार समय पर भुगतान किया जाना अनिवार्य है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी विद्यालय बिना किसी बाधा के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकें।
ठोस व्यवस्था की मांग
अभिभावक संघ और स्थानीय शिक्षाविदों ने प्रशासन से दो प्रमुख मांगें की हैं।लंबित पड़ी सभी फाइलों का निपटारा कर बकाया राशि तत्काल जारी की जाए।भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए एक ठोस ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाए, जिससे सत्र समाप्त होते ही भुगतान की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाए।
प्रशासनिक रुख
जानकारी के अनुसार, जिला शिक्षा कार्यालय अब स्कूलों से लंबित दावों की सूची फिर से मंगा रहा है। प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद चरणबद्ध तरीके से राशि का भुगतान किया जाएगा।
