
चांडिल । चांडिल डैम के समीप स्थित शीश महल में रविवार को झारखंड पुलिस एसोसिएशन की केंद्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक सह वनभोज कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्राकृतिक वादियों के बीच आयोजित इस समागम में प्रदेश भर से पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने शिरकत की। बैठक का मुख्य आकर्षण झारखंड के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों (बिहार, बंगाल और ओडिशा) के पुलिस संगठनों को एक साझा मंच पर लाने की नई रणनीति रही।
दो पालियों में हुआ अधिवेशन: संगठन की मजबूती पर जोर
कार्यक्रम को दो मुख्य पालियों में विभाजित किया गया था। पहली पाली में संगठन की आंतरिक मजबूती और विस्तार पर चर्चा हुई, जबकि दूसरी पाली में भविष्य की कार्ययोजनाओं पर मंथन किया गया। पदाधिकारियों ने झारखंड पुलिस एसोसिएशन को और अधिक धारदार और प्रभावशाली बनाने के लिए नई रणनीतियां तैयार कीं।बैठक में सर्वसम्मति से चर्चा की गई कि अपराध नियंत्रण और पुलिस कल्याण के लिए बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के पुलिस एसोसिएशनों के साथ मिलकर एक साझा मंच तैयार किया जाए।
सेवानिवृत्त पदाधिकारियों का मिला मार्गदर्शन
इस अधिवेशन की खास बात यह रही कि इसमें वर्तमान पदाधिकारियों के साथ-साथ एसोसिएशन के पूर्व और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने भी भाग लिया।चन्द्रगुप्त सिंह एवं कमल किशोर (पूर्व महामंत्री) संगठन ने एसोसिएशन की वर्तमान गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों और पदाधिकारियों के अधिकारों के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल सराहनीय हैं, बल्कि एक मिसाल भी हैं।उन्होंने पड़ोसी राज्यों के संगठनों को एकजुट करने की पहल को ‘ऐतिहासिक कदम’ करार दिया।
पुलिस वेलफेयर और भविष्य की चुनौतियां
बैठक में पुलिस कर्मियों की कार्य स्थितियों, उनके कल्याणकारी कदमों और सेवानिवृत्त कर्मियों की समस्याओं के समाधान पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि जब चार राज्यों का पुलिस संगठन एक मंच पर आएगा, तो पुलिस कर्मियों की आवाज और अधिक मजबूती से सरकार तक पहुंचेगी।
प्राकृतिक छटा के बीच वनभोज का आनंद
कार्यकारिणी की बैठक के साथ-साथ वनभोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें पुलिस परिवार के सदस्यों ने चांडिल डैम की खूबसूरती के बीच आपसी मेल-मिलाप किया। इससे तनावपूर्ण ड्यूटी के बीच अधिकारियों और कर्मियों को नई ऊर्जा मिली।
