
जमशेदपुर: जिला समाहरणालय में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के मार्गदर्शन में ‘जन शिकायत निवारण दिवस’ का आयोजन किया गया। उपायुक्त की अनुपलब्धता में एनईपी के निदेशक संतोष गर्ग ने कमान संभाली और जिले के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों फरियादियों की समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से सुना। इस दौरान कई शिकायतों का मौके पर ही निपटारा किया गया, जबकि पेचीदा मामलों के लिए संबंधित अधिकारियों को समय सीमा तय कर दी गई।
इन समस्याओं को लेकर पहुंचे नागरिक
सुनवाई के दौरान आवेदन की प्रकृति काफी विविध रही। पूर्वजों की जमीन पर अवैध कब्जा, लगान भुगतान में दिक्कत और जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले।पति द्वारा मानसिक प्रताड़ना, किरायेदार द्वारा घर खाली नहीं करने और घर से बेदखल करने जैसी शिकायतें, झारखंड मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना का लाभ, पेंशन योजना और झारखंड आंदोलनकारियों को प्रमाण पत्र निर्गत करने की मांग,स्कूलों में नामांकन में आ रही बाधाएं और रोजगार से संबंधित आवेदन और शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन और सार्वजनिक सुविधाओं की मांग को लेकर पहुंचे थे।
“ऑन द स्पॉट” समाधान और सख्त निर्देश
एनईपी निदेशक संतोष गर्ग ने नागरिकों की समस्याओं को क्रमवार सुना और प्राप्त आवेदनों को संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को अग्रसारित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि प्रत्येक आवेदन पर एक निश्चित समय सीमा के भीतर कार्रवाई होनी चाहिए।जन शिकायत निवारण दिवस पर प्राप्त आवेदनों को अन्य फाइलों की तुलना में प्राथमिकता दी जाए।उन्होंने बताया कि विभागीय समीक्षा बैठकों के दौरान इन शिकायतों की स्थिति की भी जांच की जाएगी ताकि कोई भी मामला लंबित न रहे।
शिकायतों का त्वरित निष्पादन
प्रशासनिक सतर्कता का आलम यह रहा कि कई साधारण शिकायतों का ‘ऑन द स्पॉट’ समाधान किया गया, जिससे दूर-दराज से आए ग्रामीणों और बुजुर्गों के चेहरे पर खुशी दिखी। निदेशक ने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि जनसमस्याओं का समाधान प्रशासन की पहली प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
