
जमशेदपुर : विद्या, बुद्धि और संगीत की देवी मां सरस्वती की आराधना का महापर्व ‘बसंत पंचमी’ गुरुवार को एनटीटीएफ और टाटा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बेहद धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर संस्थान के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने सामूहिक रूप से मां शारदे की वंदना की और ज्ञान के प्रकाश से जीवन को आलोकित करने का संकल्प लिया।
भक्तिमय वातावरण और पारंपरिक अनुष्ठान
सुबह से ही संस्थान परिसर में उत्सव का माहौल था। विद्यार्थियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा को सुगंधित पुष्पों और पारंपरिक साज-सज्जा से सुसज्जित किया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन एवं महाआरती की गई। इस दौरान पूरा प्रांगण भक्तिमय स्वरों से गूँज उठा। विद्यार्थियों ने अपनी पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र मां के चरणों में रखकर सफलता का आशीर्वाद मांगा।
“विद्या और सद्गुण ही जीवन का आधार”: शर्मिष्ठा दास
संस्थान की संयोजक शर्मिष्ठा दास ने विद्यार्थियों को बसंत पंचमी के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मां सरस्वती ज्ञान और संगीत की देवी हैं, और यह दिन छात्रों के लिए आत्म-चिंतन व नई ऊर्जा के साथ शिक्षा के पथ पर आगे बढ़ने का दिन है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे ज्ञान के साथ-साथ सद्गुणों को भी अपने जीवन में आत्मसात करें।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
इस अवसर पर छात्रों द्वारा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए। छात्रों ने सुरीले भजनों और संस्कृत के श्लोकों के माध्यम से मां की महिमा का गुणगान किया। विशेष रूप से आयोजित भजन संध्या में बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बसंत पंचमी: ज्ञान और प्रकृति का संगम
कार्यक्रम के दौरान बसंत पंचमी के ऐतिहासिक महत्व पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि माघ शुक्ल पंचमी को मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, जिन्होंने सृष्टि को वाणी और बुद्धि प्रदान की। पीले रंग के वस्त्र और पकवानों के माध्यम से समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश साझा किया गया।
प्रेरणा और प्रसाद वितरण
समारोह के समापन पर सभी के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुनमुन गोराई, विवेक नंदन प्रसाद और मनीषा मुंडा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि मां सरस्वती का आशीर्वाद कड़ी मेहनत और लगन से ही प्राप्त होता है।
