
जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर इन दिनों अध्यात्म और खगोल विज्ञान की चर्चाओं से सराबोर है। शहर में ज्योतिष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित करते हुए 32वें एशियन एस्ट्रोलॉजर कांफ्रेंस का भव्य शुभारंभ हुआ। इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी 100 से अधिक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, विद्वान और शोधकर्ता शामिल हो रहे हैं।
पूर्व मंत्री आलोक रंजन ने किया उद्घाटन
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार सरकार के पूर्व मंत्री आलोक रंजन ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उद्घाटन समारोह में देश के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य, समाजसेवी और शिक्षाविदों की गरिमामय उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि ज्योतिष केवल भविष्यवाणी का माध्यम नहीं, बल्कि एक गहरा विज्ञान है जो मानव जीवन को दिशा देने की क्षमता रखता है।
वैदिक से आधुनिक ज्योतिष तक पर मंथन
तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन के मुख्य आकर्षण और विषय निम्नलिखित हैं जिसमे प्राचीन भारतीय ज्योतिष की पद्धतियों पर शोध,जीवन में सुख-समृद्धि के लिए दिशाओं और अंकों का महत्व,बदलती वैश्विक परिस्थितियों और मानव स्वास्थ्य पर ग्रहों के गोचर का प्रभाव और ज्योतिष विज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ना।
युवा ज्योतिषाचार्यों को मिला वैश्विक मंच
आयोजन समिति ने इस बार युवा ज्योतिषाचार्यों और शोधकर्ताओं के लिए विशेष सत्र रखे हैं। उन्हें अनुभवी विद्वानों के समक्ष अपने शोध और अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान किया गया है। आयोजकों का उद्देश्य ज्योतिष शास्त्र में नवीनता और शुद्धता को बढ़ावा देना है।
जमशेदपुर के लिए गौरव का विषय
सम्मेलन के आयोजकों ने बताया कि इस मेगा इवेंट का उद्देश्य देश-विदेश के विद्वानों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान करना और समाज में ज्योतिष के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना है। जमशेदपुर में पहली बार इस स्तर का आयोजन होना न केवल शहर के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह ज्योतिष जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
ज्योतिष प्रेमियों में खासा उत्साह
तीन दिवसीय इस सम्मेलन को लेकर जमशेदपुर के ज्योतिष प्रेमियों, विद्वानों और आम जनता में भारी उत्साह देखा जा रहा है। सम्मेलन के दूसरे और तीसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों के साथ-साथ प्रश्नोत्तर काल का भी आयोजन किया जाएगा, जहाँ विद्वान जिज्ञासुओं की शंकाओं का समाधान करेंगे।
