
जमशेदपुर: शहर की अग्रणी सामाजिक संस्था सारथी एनजीओ ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अनूठी मिसाल पेश की है। संस्था ने मंदिरों से एकत्रित होने वाले उपयोग किए हुए फूलों से प्राकृतिक और इको-फ्रेंडली रंग (अबीर) तैयार करने का अभिनव प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह पहल न केवल नदियों को प्रदूषण से बचा रही है, बल्कि दिव्यांग बच्चों और महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोल रही है।
वेस्ट से बेस्ट: नदियों को जल प्रदूषण से बचाने की मुहिम
आमतौर पर पूजा के बाद फूलों को नदियों में विसर्जित कर दिया जाता है, जिससे जल प्रदूषण तेजी से बढ़ता है। सारथी संस्था इन फूलों को नदियों में जाने से रोककर उनका पुनर्चक्रण कर रही है।इन फूलों से तैयार अबीर पूरी तरह जैविक और त्वचा के लिए सुरक्षित है। यह मॉडल कचरे को उपयोगी उत्पाद में बदलकर पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा दे रहा है।
दिव्यांग बच्चों और महिलाओं को मिल रहा सम्मानजनक रोजगार
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता इसका मानवीय पहलू है। इस कार्य को जॉय ऑफ हैप्पीनेस स्कूल के दिव्यांग छात्र और स्थानीय महिलाएं मिलकर अंजाम दे रहे हैं।इससे दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और कौशल विकास का अवसर मिल रहा है। यह पहल उन महिलाओं के लिए आय का जरिया बनी है, जो अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती हैं।
सामाजिक समावेशन का सशक्त उदाहरण
संस्था द्वारा तैयार किए गए ये ऑर्गेनिक रंग शहर के विभिन्न मंदिरों और समुदायों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। संस्था का मानना है कि कचरा प्रबंधन और सामाजिक समावेशन के जरिए ही वास्तविक परिवर्तन संभव है।
सारथी एनजीओ की कोर टीम
इस मिशन को सफल बनाने में संस्था की टीम के सदस्य पूजा अग्रवाल, विजय अग्रवाल, शालिनी अग्रवाल, दीपक, सुशांत, आशीष, नेहा, संगीता, सोहिनी और मोनू निरंतर अपना योगदान दे रहे हैं।
