
जमशेदपुर: परसुडीह थाना अंतर्गत सरजमदा मौजा में विधायक फंड से बनने वाले विकास भवन को लेकर विवाद गहरा गया है। भवन के नामकरण और निर्माण की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सोमवार को ग्राम प्रधान लखन मुर्मू के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल परसुडीह थाना प्रभारी से मिला और मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
‘समुदाय विशेष’ के नाम पर विरोध, ग्रामसभा की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों का मुख्य विरोध भवन के नामकरण को लेकर है। ग्राम प्रधान लखन मुर्मू ने बताया कि यह भवन विधायक निधि से जनहित में बनाया जा रहा है, लेकिन क्षेत्र में इसे ‘प्रजापति भवन’ के नाम से प्रचारित किया जा रहा था। इससे स्थानीय आदिवासी और अन्य समुदायों के बीच असंतोष फैल गया है।
ग्रामीणों की प्रमुख आपत्तियां
ग्रामीणों का कहना है कि सरजमदा एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है जहाँ हर समाज के लोग रहते हैं। ऐसे में भवन का उपयोग किसी एक जाति या समुदाय विशेष के लिए न होकर सार्वजनिक (सामुदायिक) होना चाहिए।आरोप है कि ठेकेदार ने स्थानीय ग्रामसभा को बिना किसी पूर्व सूचना या विश्वास में लिए निर्माण कार्य शुरू कर दिया।प्रशासन और ठेकेदार द्वारा समुचित जानकारी साझा न करने से क्षेत्र में भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
थाना प्रभारी से न्याय की गुहार
ग्राम प्रधान लखन मुर्मू ने थाना प्रभारी को सौंपे पत्र में स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं होती और सभी समुदायों की सहमति नहीं बनती, तब तक विवाद बना रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता बरती जाए और इसे सामुदायिक भवन के रूप में ही स्थापित किया जाए।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने परसुडीह पुलिस से अनुरोध किया है कि वे निर्माण स्थल पर शांति व्यवस्था बनाए रखें और संबंधित विभाग को ग्रामसभा के साथ बैठक करने का निर्देश दें। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि बिना सहमति के किसी भी प्रकार का थोपा गया निर्माण उन्हें स्वीकार नहीं होगा।
