
जमशेदपुर : मानगो नगर निगम चुनाव 2026 जैसे-जैसे करीब आ रहा है, यहाँ की राजनीति ‘भावुक’ मोड़ लेती जा रही है। मेयर पद के लिए जारी खींचतान में अब मुद्दों से ज्यादा ‘आंसुओं’ की चर्चा हो रही है। रविवार को पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के रोने के बाद सोमवार को कांग्रेस से निष्कासित नेता शाइस्ता परवीन उर्फ जेबा खान ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फूट-फूटकर अपनी पीड़ा व्यक्त की।
“समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ हुआ अन्याय” – जेबा खान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेबा खान के आंसू उस समय छलक पड़े जब उन्होंने पार्टी से अपने निष्कासन और कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्होंने पूरी जिंदगी कांग्रेस की सेवा की, उन्हें बाहर का रास्ता दिखाकर परिवारवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है।पार्टी ने एक ऐसे नेता (बन्ना गुप्ता) को खुली छूट दे रखी है जिनकी विचारधारा कांग्रेस की मूल लाइन से मेल नहीं खाती। जेबा खान ने अपने हाथों में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और बन्ना गुप्ता की तस्वीरें लेकर यह संदेश देने की कोशिश की कि पर्दे के पीछे का खेल कुछ और ही है।
बन्ना गुप्ता का ‘इमोशनल कार्ड’ और सियासी टकराव
इससे पहले रविवार को मेयर प्रत्याशी सुधा गुप्ता के समर्थन में आयोजित जनसभा में पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता मंच पर ही रोने लगे थे। इसे उनके विरोधियों ने चुनावी स्टंट बताया, जबकि समर्थकों ने इसे जनता के प्रति उनका प्रेम करार दिया। अब जेबा खान के आंसुओं ने इस लड़ाई को ‘इमोशनल वॉर’ में तब्दील कर दिया है।
मैदान में डटी हैं जेबा, जनता पर भरोसा
पार्टी से निष्कासन के बावजूद जेबा खान ने साफ कर दिया है कि वे मेयर पद की रेस से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कहा पार्टी ने भले ही मेरे साथ अन्याय किया हो, लेकिन मानगो की जनता मेरे साथ है। मैं मजबूती से चुनाव लड़ूँगी और क्षेत्र की जनता ही तय करेगी कि किसके आंसू सच्चे हैं और किसका संघर्ष वास्तविक।
आंसुओं के बीच छिपी असली चुनौती
मानगो में मुकाबला अब दिलचस्प हो गया है। एक तरफ बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता (कांग्रेस समर्थित) हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा समर्थित संध्या सिंह और बागी तेवर अपनाए जेबा खान। इसके अलावा कुमकुम श्रीवास्तव भी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही हैं।
