
जमशेदपुर: झारखंड साहित्य सभा के तत्वावधान में डिमना स्थित डॉ. लता मानकर के आवास पर ‘होली मिलन सह कवि गोष्ठी’ का भव्य आयोजन किया गया। साहित्य और फागुनी उल्लास के इस संगम में शहर के प्रबुद्ध रचनाकारों ने अपनी लेखनी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना
कार्यक्रम की अध्यक्षता जलेस के अध्यक्ष श्री अशोक शुभदर्शी, श्री जगदीश सहाय और रघुनाथ पांडे ने संयुक्त रूप से की। समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर किया गया। रीना सलोनी ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
काव्य पाठ के प्रमुख अंश: जब तालियों से गूंजा हॉल
कवि गोष्ठी का प्रारंभ संजय सोलोमन के इस सशक्त शेर से हुआ
“तूफान से डर कर साहिल पर रहना है आसान बहुत,
मौजों से लड़कर दरिया को पार करो तो बात बने।”
इसके बाद रचनाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं जिसमे अंजू केशव ने “ये बना लेंगे यहीं दिल में ठिकाना जानिए, हो सके तो दर्द को आंसू बनाना जानिए।”
शाबिर नवादवी ने “मेरा मयार उनको खल रहा है हसरत जिनके दिलों में पल रहा है, अंधेरे भी परेशान हो रहे हैं दीया कैसे हवा में जल रहा है।”
रीना सलोनी (होली विशेष): “बिना तेरे हैं फीके से सभी श्रृंगार होली में, तुम आओ तो गुलाबी हो मेरे रुखसार होली में।”
डॉ. लता मानकर (मेजबान): “बौराए फागुन से कह दो तू मेरा संदेश, खेलनी जिनके संग में होरी वे तो गए विदेश।”
इसके अतिरिक्त उदय हयात, सुनीता सोनी, वरुण प्रभात और जयप्रकाश पांडे ने भी अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से समाज के विभिन्न पहलुओं और प्रेम की अनुभूतियों को साझा किया।
गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति
लगभग तीन घंटे तक चले इस सफल कार्यक्रम में डिमना और आसपास के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से धीरेंद्र प्रसाद सिंह, रामदेव प्रसाद, धनंजय राय, विजय पासवान और रामेश्वर सिंह शामिल थे।
सफल संचालन और समापन
पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. लता मानकर ने किया। गोष्ठी के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की अग्रिम शुभकामनाएं दीं और सामूहिक स्वर में साहित्य की सेवा का संकल्प लिया।
