
जमशेदपुर: भारतीय रेलवे की सुरक्षा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से टाटानगर रेलवे सिविल डिफेंस द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रेलवे की नई बहाली से आए दर्जनों असिस्टेंट लोको पायलट और रिफ्रेशर लोको पायलटों को आपदा प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया गया।
इंजन और कोच में आग लगने पर नियंत्रण का प्रशिक्षण
इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित इस सत्र के दौरान लोको पायलटों को यह सिखाया गया कि ट्रेन के इंजन या कोच में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगने की स्थिति में किस प्रकार त्वरित कार्रवाई करनी है। प्रशिक्षण में लोकोमोटिव (इंजन) में उपलब्ध फायर एक्सटिंगुइशर (अग्निशामक संयंत्र) को चलाने का व्यावहारिक अभ्यास, बिजली से लगने वाली आग पर प्रभावी नियंत्रण की तकनीकी जानकारी दी गई।
सीपीआर और फर्स्ट एड: यात्रियों की जान बचाने की कवायद
सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार के नेतृत्व में नए लोको पायलटों को फर्स्ट एड (प्राथमिक चिकित्सा) और सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने की ट्रेनिंग दी गई। संतोष कुमार ने बताया लोको पायलट रेल संचालन के दौरान आपदा के समय प्रथम उत्तरदाता होते हैं। यदि वे रेस्क्यू और सीपीआर की तकनीक जानते हैं, तो पेशेवर सहायता पहुँचने तक यात्रियों या अन्य रेल कर्मचारियों की जान बचाने में सक्षम होंगे।
आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू तकनीक
प्रशिक्षण में ‘रेस्क्यू’ (बचाव कार्य) के विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया। सिविल डिफेंस के सदस्यों ने बताया कि दुर्घटना या किसी आपातकालीन स्थिति में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किन-किन सावधानियों और उपकरणों की आवश्यकता होती है।इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई तकनीक के साथ-साथ रेल संचालन में सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि यह प्रशिक्षण रेल यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
