जमशेदपुर में मछुआ बस्ती के लोगों का समाहरणालय पर प्रदर्शन, सामुदायिक भवन पर कब्जे का आरोप

जमशेदपुर। शहर के जिला समाहरणालय परिसर में सोमवार को उस समय माहौल गरमा गया जब टेल्को के जेम्को स्थित मछुआ बस्ती के सैकड़ों लोग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच गए। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को और मुखर बना दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याओं को सामने रखा।

उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद बस्ती के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के नाम एक ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बस्ती में बने सामुदायिक भवन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों को उसका उपयोग करने में परेशानी हो रही है।

सामुदायिक भवन पर कब्जे का आरोप

बस्तीवासियों के अनुसार मनोज मछुआ नामक व्यक्ति ने सामुदायिक भवन को अपने कब्जे में ले रखा है और आम लोगों को वहां प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा। इतना ही नहीं, भवन के सामने स्थित खाली जमीन पर भी कथित रूप से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोग लगातार विरोध कर रहे हैं।

विरोध करने पर मारपीट का आरोप

बस्ती के लोगों ने आरोप लगाया कि जब भी वे इस कब्जे का विरोध करते हैं तो मनोज और उसके सहयोगियों द्वारा मारपीट की जाती है। कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्हें धारदार हथियार से हमला कर डराने-धमकाने की कोशिश की गई, जिससे इलाके में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

दो दिन पहले भी हुई थी हिंसक झड़प

बताया जा रहा है कि दो दिन पहले भी इसी बस्ती में दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें एक महिला समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सभी घायलों का इलाज टाटा मेन हॉस्पिटल में चल रहा है।हालांकि उस समय विवाद की वजह देर रात डीजे बजाने को लेकर विवाद बताया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि असली कारण सामुदायिक भवन को लेकर चल रहा विवाद ही है।

समाहरणालय परिसर में बढ़ी सुरक्षा

प्रदर्शन के दौरान जिला समाहरणालय परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि किसी बड़े टकराव की सूचना नहीं मिली है।

कब्जा हटाने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

बस्तीवासियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक सामुदायिक भवन को कब्जामुक्त नहीं कराया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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