चाईबासा : स्थानीय मधु बाजार स्थित सनातन धर्मशाला परिसर में मंगलवार को चार दिवसीय चाईबासा पुस्तक मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस ज्ञान कुंभ में शिक्षा, कला और साहित्य जगत की नामचीन हस्तियों ने शिरकत की और समाज में पठन-पाठन की संस्कृति को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।
दिग्गज हस्तियों ने बढ़ाया मान
उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से उपस्थित अतिथियों ने मेले की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। तरुण मुहम्मद (फिल्म निर्माता-निर्देशक) ने कहा कि मेले में ज्ञानवर्धक पुस्तकों का संग्रह हर वर्ग के लिए उपयोगी है।राजकिशोर साहू (राष्ट्रपति सम्मानित सेवानिवृत्त प्राचार्य) ने कहा की मोबाइल के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि पुस्तकों से दोस्ती ही जीवन को सही दिशा देती है।प्रियदर्शी जरूहार ने कहा किताबों को व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला बताया।पुरुषोत्तम शर्मा (सेवानिवृत्त प्राचार्य) ने इस मेले को चाईबासा के बौद्धिक विकास के लिए एक ‘मील का पत्थर’ करार दिया।
“पुस्तकों के सामने झुकेंगे, तो दुनिया के सामने नहीं”
समय इंडिया (नई दिल्ली) के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने अतिथियों का स्वागत किया और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रेरक विचारों को साझा किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पुस्तकों के सामने झुककर ज्ञान अर्जित करता है, उसे जीवन में कभी किसी और के सामने झुकने की जरूरत नहीं पड़ती।
सांस्कृतिक रंग और स्वागत
कार्यक्रम का सफल संचालन कलाकार शीतल सुगंधिनी बागे ने किया। समारोह की शुरुआत में अतिथियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। मेले में विभिन्न विधाओं की पुस्तकों के स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ पहले ही दिन पाठकों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली।
क्यों खास है यह पुस्तक मेला?
डिजिटल बनाम फिजिकल: वक्ताओं ने जोर दिया कि मोबाइल की स्क्रीन से हटकर पन्नों की खुशबू और गहरा ज्ञान ही वास्तविक बौद्धिक संपदा है।चाईबासा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए दुर्लभ पुस्तकें एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई गई हैं।यह मेला आगामी तीन दिनों तक सुबह से शाम तक पाठकों के लिए खुला रहेगा।
