जमशेदपुर : समाहरणालय में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त राजीव रंजन ने जिले में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं और प्रशासनिक कार्यसंस्कृति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासनिक अनुशासन: “मुख्यालय छोड़ना पड़ेगा भारी”
उपायुक्त ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों और अंचलाधिकारियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए। सभी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से अपने प्रखंड मुख्यालय में निवास करने और कार्य दिवसों पर समय पर कार्यालय पहुँचने का निर्देश दिया गया।आम जनता की समस्याओं का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा गया। मुख्यालय से बाहर रहने या जनशिकायतों की अनदेखी पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
आवास योजना: मई माह की ‘डेडलाइन’
लंबित आवास योजनाओं (प्रधानमंत्री आवास योजना/अन्य) की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने समय सीमा निर्धारित की। जिन आवासों का काम प्लींथ या लिंटर स्तर पर अटका है, उन्हें मई माह के भीतर हर हाल में पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों को लाभुकों के साथ नियमित संपर्क में रहकर तकनीकी बाधाओं को तुरंत दूर करने को कहा गया।
मनरेगा: हर गांव में शुरू होंगी 5 नई योजनाएं
ग्रामीण रोजगार और आधारभूत संरचना को मजबूती देने के लिए मनरेगा की समीक्षा की गई। सभी बीपीओ को एक सप्ताह के भीतर प्रत्येक गांव में कम से कम पांच-पांच योजनाएं शुरू करने का आदेश दिया गया। मानव दिवस के सृजन में तेजी लाने और बरसात शुरू होने से पहले जल संरक्षण, तालाब और ग्रामीण सड़कों से जुड़े कार्यों को पूर्ण करने पर जोर दिया गया।
निधियों का सदुपयोग और गुणवत्ता
बैठक में डीएमएफटी , नीति आयोग फंड, सांसद और विधायक निधि से चल रही परियोजनाओं की भी पड़ताल की गई।उपायुक्त ने कार्यकारी एजेंसियों को निर्माण कार्य की गुणवत्ता से समझौता न करने की हिदायत दी।उन्होंने कहा कि सरकारी निधियों का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाना है, इसलिए योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
बैठक में मुख्य उपस्थिति
समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से निदेशक एनईपी संतोष गर्ग ,सभी प्रखंडों के बीडीओ , सीओ , बीपीओ एवं संबंधित विभागों के कनीय अभियंता व कर्मी उपस्थित थे।
