ए डी एल सोसाइटी स्कुल शिक्षक नियुक्ति और 16 लाख घोटाला मामले पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर 28 को होंगी सुनवाई

जमशेदपुर : जमशेदपुर का प्रतिष्ठित और झारखंड सरकार से मान्यता प्राप्त भाषाई अल्पसंख्यक स्कूल ए.डी.एल. सोसाइटी मध्य विद्यालय (साकची) इस वक्त भ्रष्टाचार के सबसे बड़े बवंडर से घिर गया है। स्कूल में योग्य तेलुगु शिक्षकों को दरकिनार कर पैसे के दम पर अपने करीबियों को बहाल करने और हिंदी माध्यम विद्यालय के ₹16 लाख सरकारी फंड को अवैध रूप से अंग्रेजी माध्यम में ट्रांसफर करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।इस भ्रष्टाचार के खिलाफ 28 मई को जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय में शिकायतकर्ता और स्कूल प्रबंधन को साक्ष्यों के साथ तलब किया गया है, जिस पर पूरे शहर की नजरें टिकी हुई हैं।

2023 से शुरू हुआ पैसों का खेल: 88% अंक पाने वाले तेलुगु शिक्षक किए गए रिजेक्ट

इस पूरे नियुक्ति घोटाले की पटकथा वर्ष 2023 में लिखी गई थी। 27 सितंबर 2023 को ए.डी.एल. सोसाइटी मध्य विद्यालय में 7 शिक्षकों की बहाली के लिए विज्ञापन निकाला गया था। चूंकि यह तेलुगु भाषाई अल्पसंख्यक स्कूल है, इसलिए नियमों के तहत विज्ञापन में साफ कहा गया था कि तेलुगु भाषा के शिक्षकों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी।इसके बाद बकायदा परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा में 5 अन्य सामान्य शिक्षकों के अलावा 88% से अधिक अंक पाने वाले 2 योग्य तेलुगु भाषा के शिक्षकों का भी चयन मेरिट लिस्ट में हुआ। आरोप है कि जैसे ही अंतिम बहाली की बारी आई, तो मैनेजमेंट और बैकडोर से पैसों का खेल शुरू हो गया। ज्यादा अंक पाने वाले दोनों तेलुगु शिक्षकों को जानबूझकर ‘कागजी अनियमितता’ का झूठा हवाला देकर रिजेक्ट कर दिया गया।

हाई स्कूल के प्रिंसिपल प्रभात कुमार ने अपनी भतीजी और करीबियों को घुसाया!

शिक्षकों की नियुक्ति में मेरिट को ताक पर रखकर कथित तौर पर लाखों रुपये की डीलिंग की गई। जांच के दायरे में आई जानकारियों के अनुसार, स्कूल के हाई स्कूल विंग के प्रधानाध्यापक (प्रिंसिपल) प्रभात कुमार ने इस पूरे फर्जीवाड़े में मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी हनक का इस्तेमाल करते हुए अपनी सगी भतीजी और अन्य करीबियों की अवैध रूप से बहाली करवा दी। इस पैसे के खेल का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि वर्तमान में इस पूरे तेलुगु अल्पसंख्यक स्कूल में एक भी तेलुगु भाषा का मान्यता प्राप्त टीचर नहीं बचा है। नतीजतन, स्कूल में पढ़ने वाले गरीब तेलुगु समाज के बच्चे अपनी मातृभाषा सीखने के अधिकार से पूरी तरह वंचित हो रहे हैं।

सरकारी फंड का बड़ा डाका: हिंदी मीडियम के ₹16 लाख अंग्रेजी मीडियम में ट्रांसफर

इस संस्थान में केवल नियुक्ति घोटाला ही नहीं हुआ, बल्कि सरकारी पैसों की भी जमकर बंदरबांट की गई। सरकारी नियमों और ऑडिट को ठेंगा दिखाते हुए हिंदी मध्य विद्यालय के संचालन और विकास के लिए झारखंड सरकार से मिलने वाले ₹16,00000 (सोलह लाख रुपये) की अनुदान राशि को गलत और अवैध वित्तीय तरीके से ए.डी.एल. के अंग्रेजी माध्यम स्कूल के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया, जो सीधे तौर पर एक बड़ा आर्थिक अपराध है।

शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन की अकस्मात मृत्यु से अधर में रुकी थी जांच, जिला परिषद अध्यक्ष बारी मुर्मू ने मुख्यमंत्री से कराई पहल

इस महाघोटाले को उजागर करने और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए ए.डी.एल. सोसाइटी के पूर्व महासचिव के. गुरुनाथ राव पिछले कई वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। के. गुरुनाथ राव ने जिला शिक्षा अधीक्षक को करीब 8 से 10 बार लिखित पत्र देकर इस भ्रष्टाचार से अवगत कराया था, लेकिन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद राव ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन से मिलकर इसकी लिखित शिकायत की थी। शिक्षा मंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए थे, लेकिन उनकी अकस्मात मृत्यु हो जाने के कारण यह जांच ठंडे बस्ते में चली गई और भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हो गए।

बारी मुर्मू की पहल पर हेमंत सोरेन का कड़ा एक्शन

इसके बाद इस लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती बारी मुर्मू ने सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और उन्हें पूरे घोटाले का दस्तावेज सौंपकर उच्चस्तरीय कार्रवाई की मांग की। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी धालभूम को इस जांच का जिम्मा सौंपा।

अब 28 मई को होगा दूध का दूध और पानी का पानी

मुख्यमंत्री सचिवालय की सीधी निगरानी में एसडीओ धालभूम ने जांच की कमान संभाल ली है। इसी के आलोक में जिला शिक्षा अधीक्षक ने एक आधिकारिक नोटिस जारी कर शिकायतकर्ता के. गुरुनाथ राव और आरोपी प्रधानाध्यापक प्रभात कुमार व प्रबंधन को 28 मई को सभी मूल साक्ष्यों, बैंक स्टेटमेंट और नियुक्ति दस्तावेजों के साथ सशरीर उपस्थित होने का कड़ा आदेश दिया है। इस दिन जमशेदपुर के शिक्षा जगत के इस सबसे बड़े घोटाले के चेहरों का बेनकाब होना लगभग तय माना जा रहा है।

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