‘वीणा रानी पवन स्मृति सम्मान समारोह’ में साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम, विभूतियों का हुआ सम्मान

जमशेदपुर : बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ‘सहयोग’ एवं विद्यादीप फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘वीणा रानी पवन स्मृति सम्मान समारोह’ साहित्य, शिक्षा, संस्कृति, संगीत, नृत्य और रंगमंच के विविध रंगों से सराबोर रहा। समारोह में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया, वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सहयोग गीत और पंचतत्व नृत्य से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. पद्मा झा द्वारा प्रस्तुत ‘सहयोग गीत’ से हुई। इसके बाद डी.बी.एम.एस. कॉलेज फॉर एजुकेशन की छात्राओं ने ‘पंचतत्व’ विषय पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति का निर्देशन पामेला घोष दत्ता ने किया, जबकि सुमेधा दत्ता, तृषा सरकार, आकांक्षा दास, मौमिता चक्रवर्ती एवं सुप्रीति दास ने प्रभावशाली नृत्य प्रस्तुत किया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ औपचारिक उद्घाटन

समारोह का औपचारिक शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर तथा माँ सरस्वती एवं अम्मा की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया। इसके बाद उपासना सिन्हा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।संस्था की अध्यक्ष डॉ. संध्या सिन्हा ने स्वागत भाषण देते हुए संस्था की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. अनिता राकेश ने दिवंगत शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. वीणा रानी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण किया।

विभिन्न सम्मानों से विभूतियों का अभिनंदन

समारोह के दौरान कई प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए गए—

सहयोग निधि सम्मान – डॉ. अनिता राकेश एवं डॉ. भारती द्वारा
साहित्य सृजन सम्मान – डॉ. जूही समर्पिता के सहयोग से
वैदुष्यमणि डॉ. वीणा रानी सम्मान – मुख्य अतिथि सरयू राय एवं परिजात सौरभ द्वारा
डॉ. वीणा रानी ‘प्रभा’ सम्मान – विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा एवं परिजात सौरभ द्वारा

सरयू राय ने साहित्य और संस्कृति के महत्व पर दिया जोर

मुख्य अतिथि एवं जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य और कला समाज की संवेदनशील चेतना का आधार हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, साहित्य और मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा ने साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया।

‘उर्वशी’ नृत्य-नाटिका बनी आकर्षण का केंद्र

सांस्कृतिक सत्र का सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी कृति ‘उर्वशी’ पर आधारित भव्य नृत्य-नाटिका रही। इसका परिचय डॉ. रागिनी भूषण ने दिया।इस प्रस्तुति की पटकथा एवं संवाद: डॉ. रागिनी भूषण,गीत एवं पृष्ठभूमि संगीत: मसूर सिद्दीकी,नाट्य निर्देशन: अवतार सिंह और नृत्य निर्देशन: सुधा दीप ने किया।

‘उर्वशी’ नृत्य-नाटिका के प्रमुख कलाकार

उर्वशी: निवेदिता महापात्र
राजा पुरुरवा: शिवम कुमार सिंह
चित्रलेखा: अदिति झा
रानी औशिनरी: अर्पिता डे
कंचुकी: श्रुति शर्मा
सुकन्या: आराध्या चंद्र
आयु: समरजीत गुप्ता
अप्सराएँ: सिमरन झा, चिनापानी तम्मना रेड्डी, मान्विका कीर्तिश्री, अनुष्का गुप्ता, परिधि पंडित, आद्या झा, परी महतो एवं अन्वेषा महतो

प्रस्तुति के बाद सभी कलाकारों एवं निर्देशकों को मुख्य अतिथि सरयू राय, विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा, डॉ. अनिता राकेश एवं परिजात सौरभ द्वारा सम्मानित किया गया।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में संस्था की सचिव डॉ. भारती कुमारी ने सभी अतिथियों, कलाकारों, सम्मानित विभूतियों, सहयोगियों एवं दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।यह आयोजन साहित्य, कला एवं संस्कृति के विविध आयामों को एक मंच पर प्रस्तुत करते हुए दिवंगत शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. वीणा रानी की स्मृति को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रेरणादायी प्रयास साबित हुआ।

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