चाईबासा: शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग को लेकर “नो एंट्री आंदोलन समिति, कोल्हान” ने एक बड़ा कदम उठाया है। रविवार को तांबो चौक से सैकड़ों की संख्या में आंदोलनकारी रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास तक की 6 दिवसीय पदयात्रा पर निकल पड़े हैं।
जानलेवा साबित हो रहे भारी वाहन
आंदोलनकारियों का आरोप है कि शहर के भीतर से भारी वाहनों के गुजरने के कारण आए दिन मासूम लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। शहर और घनी आबादी वाले इलाकों में भारी वाहनों के लिए ‘नो एंट्री’ का समय निर्धारित किया जाए और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग सुनिश्चित हो।समिति के सदस्यों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण उन्हें अब पदयात्रा का रास्ता चुनना पड़ा है।
महीनों से जारी है संघर्ष
यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा घटनाक्रम है। बीते वर्ष अक्टूबर में भी मांग को लेकर जोरदार सड़क जाम और प्रदर्शन किया गया था।हाल ही में समिति का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से भी मिला था और उन्हें क्षेत्र की गंभीर स्थिति से अवगत कराया था।लगातार दबाव के बावजूद अब तक प्रशासन ने कोई लिखित या ठोस योजना प्रस्तुत नहीं की है।
6 दिनों की चेतावनी
पदयात्रा पर निकले युवाओं और बुजुर्गों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यह यात्रा सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का आखिरी शांतिपूर्ण जरिया है।यदि 6 दिनों की इस पदयात्रा के दौरान या इसके समापन तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो कोल्हान क्षेत्र में आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा।
