जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शनिवार सुबह एक भावुक और चिंताजनक स्थिति देखने को मिली। अस्पताल में तैनात एक आदिवासी महिला होमगार्ड जवान को जब यह जानकारी मिली कि अगले सप्ताह भी उनके बकाया मानदेय के भुगतान की संभावना नहीं है, तो वह भावुक हो गईं। आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही महिला ने जल्द भुगतान की मांग की।
गंभीर बीमारी से भी जूझ रही हैं महिला
जानकारी के अनुसार, बोड़ाम थाना क्षेत्र निवासी फूलकुमारी पिछले कई महीनों से रीढ़ के पास असहनीय दर्द से पीड़ित हैं। उन्होंने एमजीएम अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन राहत नहीं मिलने पर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक चिकित्सक से उपचार शुरू कराया है।महिला के अनुसार, चिकित्सकों ने ऑपरेशन की आवश्यकता बताई है, जिसके लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधनों की जरूरत है। मानदेय का भुगतान लंबित रहने के कारण उनके लिए इलाज कराना मुश्किल हो गया है।
साथी जवानों ने दी सांत्वना
महिला की भावनात्मक स्थिति की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल परिसर में मौजूद अन्य होमगार्ड जवान उनके पास पहुंचे। उन्हें अस्पताल के पूछताछ केंद्र में बैठाकर समझाया गया और मानसिक रूप से सहयोग प्रदान किया गया। इस दौरान कई जवानों ने भी लंबित मानदेय को लेकर चिंता व्यक्त की।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
बताया जा रहा है कि करीब एक सप्ताह पहले एमजीएम अस्पताल में कार्यरत एक अन्य महिला होमगार्ड भी मानसिक तनाव के कारण अस्वस्थ हो गई थीं। उपचार के बाद वह अब स्वस्थ होकर पुनः ड्यूटी पर लौट चुकी हैं।
लंबित भुगतान को लेकर बढ़ रही चिंता
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने होमगार्ड जवानों की आर्थिक और मानसिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जवानों का कहना है कि लंबे समय से मानदेय का भुगतान लंबित रहने के कारण उन्हें परिवार, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने संबंधित विभाग से बकाया मानदेय के शीघ्र भुगतान और समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।
