जमशेदपुर: डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन एलुमनाई एसोसिएशन ‘सेतु’ के तत्वावधान में कॉलेज परिसर में “प्रभावी संचार कौशल” विषय पर एक दिवसीय ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह विशेष सत्र एलुमनाई मॉडरेटर अमृता चौधरी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।इस सत्र का मुख्य उद्देश्य बीएड और प्रशिक्षण ले रहे छात्र-छात्राओं को संचार की आधुनिक अवधारणा और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में इसके महत्व से व्यावहारिक रूप से अवगत कराना था।
नर्सरी व फाइन आर्ट शिक्षिका संगीता कौर ने संभाली मुख्य वक्ता की कमान
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ कॉलेज की छात्रा प्रज्ञा प्रियदर्शिनी द्वारा अतिथि वक्ता के स्वागत एवं परिचय के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता श्रीमती संगीता कौर (नर्सरी एवं फाइन आर्ट शिक्षिका, डी.बी.एम.एस. कदमा हाई स्कूल) की शिक्षा, कला और अध्यापन के क्षेत्र में रही उत्कृष्ट उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
सेंडर से फीडबैक तक: फ्लो-चार्ट से समझाई संवाद की बारीकियां
अपने व्याख्यान में मुख्य वक्ता श्रीमती संगीता कौर ने संचार के गूढ़ सिद्धांतों को बेहद सरल और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बोर्ड पर फ्लो-चार्ट के माध्यम से संचार की पूरी प्रक्रिया को समझाते हुए इसके पांच प्रमुख घटकों—प्रेषक , संदेश, माध्यम, प्राप्तकर्ता और प्रतिपुष्टि पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने भावी शिक्षकों को बताया कि जब तक क्लास में छात्रों की तरफ से सही ‘फीडबैक’ (प्रतिपुष्टि) न मिले, तब तक एक शिक्षक का संवाद अधूरा और बेअसर माना जाता है।
क्लासरूम कम्युनिकेशन की 5 बड़ी बाधाएं और उनका समाधान
श्रीमती कौर ने कक्षा के दौरान या आम जीवन में बातचीत के समय आने वाले अवरोधो को रेखांकित करते हुए उनसे निपटने के व्यावहारिक तरीके साझा किए। उन्होंने मुख्य रूप से इन बाधाओं पर चर्चा की जिसमे शब्दों या विचारों का साफ न होना। छात्रों और शिक्षक के बीच भाषाई समझ का अंतर। सामने वाले की बात को ध्यान से न सुनना। क्लासरूम या आस-पास का शोरगुल।बच्चों के भीतर का डर, संकोच या तनाव।
“प्रभावी संचार ही एक सामान्य शिक्षक को ‘बेहतरीन’ बनाता है”
शिक्षण विधा में संचार के महत्व को रेखांकित करते हुए वक्ता ने कहा कि एक अच्छा कम्युनिकेटर ही अच्छा शिक्षक बन सकता है। प्रभावी संवाद कला के जरिए एक शिक्षक कठिन से कठिन विषयवस्तु को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर सकता है, विद्यार्थियों को प्रेरित कर सकता है, उनमें आत्मविश्वास जगा सकता है और पूरी कक्षा में एक सकारात्मक व इंटरैक्टिव (सहभागिता पूर्ण) माहौल बना सकता है।
गरिमापूर्ण रही उपस्थिति
इस अत्यंत संवादात्मक और उपयोगी सत्र के दौरान मुख्य रूप से एलुमनाई सलाहकार श्रीप्रिया धर्मराजन, संयुक्त सचिव सुधा दिलीप के साथ-साथ महाविद्यालय के प्राचार्य, उप-प्राचार्य, सभी व्याख्याता, गैर-शैक्षणिक कर्मचारी और भारी संख्या में प्रशिक्षु विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का औपचारिक समापन आर्तिका ज्योति द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
