जमशेदपुर: भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस पर कांग्रेस ने किया नमन; जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह बोले- ‘जल, जंगल और जमीन की रक्षा के महानायक थे धरती आबा’

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में ‘धरती आबा’ भगवान बिरसा मुंडा जी का शहादत दिवस (पुण्यतिथि) मंगलवार को साकची में पूरी श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता साकची स्थित भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा स्थल पर एकत्रित हुए।

प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी भावभीनी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह सहित सभी कांग्रेसजनों ने भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उनके ऐतिहासिक संघर्षों, अमर बलिदान और उच्च आदर्शों को स्मरण करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

उलगुलान स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय: परविंदर सिंह

सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा किसी एक समाज के नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव हैं। उन्होंने कहा “भगवान बिरसा मुंडा केवल आदिवासी समाज के नायक ही नहीं, बल्कि देश के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं जन-जागरण के अग्रदूत थे। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के दमन, शोषण और अन्याय के विरुद्ध संगठित संघर्ष का बिगुल फूंका तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व किया।”उन्होंने आगे कहा कि अल्पायु में ही बिरसा मुंडा ने जिस अदम्य साहस और त्याग का परिचय दिया, वह आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत है। अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला देने वाला उनका “उलगुलान” आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। 9 जून 1900 को रांची जेल में भले ही वे शहीद हो गए, लेकिन उनके विचार आज भी जनमानस में अमर हैं।

कुरीतियों के खिलाफ चलाया था आंदोलन

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी भगवान बिरसा मुंडा के सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धरती आबा ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ एक बड़ा जन-जागरण अभियान चलाया था। उन्होंने समाज को आत्मसम्मान, शिक्षा और संगठन की सच्ची राह दिखाई। वक्ताओं ने एकजुट होकर कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन सामाजिक न्याय, समानता और जनकल्याण के मूल्यों का प्रतीक है और उनके बताए मार्ग पर चलकर ही एक समतामूलक व न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।

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