जमशेदपुर: दहेज के लिए हत्या करने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे सोनू कुशवाहा को जमशेदपुर की अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मंजू कुमारी के न्यायालय ने परिस्थितिजनक साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाया।
2021 की घटना और दर्ज मुकदमा
यह मामला 4 सितंबर 2021 का है, जब सुषमा कुशवाहा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच में यह जहर खाने से हुई मौत का मामला प्रतीत हो रहा था। मृतका के पिता राज नारायण कुशवाहा ने 5 सितंबर 2021 को सोनारी थाना में मामला दर्ज कराया था।पिता का आरोप था कि 2020 में शादी के बाद से ही सोनू और उसके ससुराल वाले (सास-ससुर, ननद और देवर) दहेज के लिए सुषमा को प्रताड़ित कर रहे थे और उन्होंने ही उसकी हत्या की है।
न्यायालय में ससुर के बयान ने बदला रुख
करीब 6 वर्षों तक चले इस कानूनी ट्रायल में तब नया मोड़ आया जब मृतका के पिता (ससुर) ने स्वयं अदालत में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य स्वीकार किए।ससुर ने न्यायालय में स्वीकार किया कि जब उनकी बेटी की मृत्यु हुई, उस समय उनका दामाद सोनू कुशवाहा दिल्ली में था। उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने किसी को अपनी बेटी को जहर देते हुए नहीं देखा था। ससुर ने अदालत को बताया कि उन्होंने केवल लिखित प्राथमिकी पर अपने हस्ताक्षर किए थे।
बचाव पक्ष की दलीलें और फैसला
आरोपी और उसके परिवार की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, शिव शंकर प्रसाद और बबिता जैन ने प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि सोनू के खिलाफ कोई भी प्रत्यक्ष या पुख्ता साक्ष्य मौजूद नहीं है और घटना के समय उसकी लोकेशन भी शहर से बाहर थी।न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा है। इसी के आधार पर सोनू कुशवाहा को बरी करने का आदेश जारी किया गया।
