जमशेदपुर। झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद चुनौतियों, कमियों और उनके समाधान पर गंभीर चर्चा के लिए 6 सितंबर को जमशेदपुर में ‘फैक्ट फाइंडिंग सेमिनार’ आयोजित किया जाएगा। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कार्यक्रम की जानकारी दी।यह सेमिनार स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट और नेचर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शिक्षकों और छात्रों के विचार लिए जाएंगे।
शिक्षा व्यवस्था की कमियों की पहचान कर सरकार को दिए जाएंगे सुझाव
सरयू राय के अनुसार, सेमिनार का मुख्य उद्देश्य झारखंड के शिक्षा क्षेत्र में मौजूद कमियों और चुनौतियों की पहचान करना है। इसके साथ ही इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार को ठोस और व्यावहारिक सुझाव देने पर भी चर्चा होगी।उन्होंने बताया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों को केवल प्रशासनिक स्तर पर देखने के बजाय विद्यार्थियों और शिक्षकों के अनुभवों को भी चर्चा का हिस्सा बनाया जाएगा।
आंदोलनरत छात्रों को भी किया गया आमंत्रित
सरयू राय ने बताया कि हाल के दिनों में रांची में विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों को भी सेमिनार में आमंत्रित किया गया है।छात्र कार्यक्रम में अपनी समस्याओं, असंतोष के कारणों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को सीधे मंच पर रखने का अवसर पाएंगे। इससे छात्र-युवा वर्ग की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान पर विचार करने में मदद मिलेगी।
एक मंच पर होंगे तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपति
सेमिनार में झारखंड के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इनमें रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा,विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा और झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह शामिल होंगे। सरयू राय ने एक ही मंच पर तीन कुलपतियों की मौजूदगी को कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता बताया।
सरकारी कार्यों में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति पर उठे सवाल
सरयू राय ने शिक्षकों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी कार्यों में लगातार शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति किए जाने के कारण वे अपने मूल दायित्व यानी विद्यार्थियों को पढ़ाने से दूर होते जा रहे हैं।उनके अनुसार, इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद तथा शैक्षणिक जुड़ाव प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। सेमिनार में इस मुद्दे पर भी चर्चा की जाएगी।
सुबह 9 बजे से शुरू होगा कार्यक्रम
आयोजन समिति के अनुसार, कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे पंजीकरण से होगी। इसके बाद सुबह 10 से 11 बजे तक उद्घाटन सत्र आयोजित किया जाएगा।इसके बाद कार्यक्रम को अलग-अलग सत्रों में बांटा गया है।
पहला सत्र: प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा
पहले सत्र में झारखंड की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों, कमियों और सुधार के उपायों पर चर्चा होगी।
दूसरा सत्र: उच्च शिक्षा और छात्र-युवा असंतोष
दूसरे सत्र में उच्च शिक्षा की स्थिति के साथ-साथ छात्र और युवा वर्ग में बढ़ रहे असंतोष के कारणों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
तीसरा सत्र: शिक्षकों का सम्मान
भोजनावकाश के बाद तीसरा सत्र आयोजित होगा। इसमें शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
स्कूलों और शिक्षण संस्थानों को किया गया आमंत्रित
आयोजन समिति ने जिले के विभिन्न विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को सेमिनार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। आयोजकों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिक से अधिक लोगों को एक मंच पर लाकर समस्याओं और संभावित समाधानों पर सार्थक चर्चा करना है।
