जमशेदपुर बंद: हिमांशु मर्डर केस के खिलाफ सड़कों पर उतरा एनडीए, साकची-बिष्टुपुर समेत पूरा शहर ठप, सुरक्षा में भारी पुलिस बल मुस्तैद

जमशेदपुर:जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित ‘डबल डाउन’ बार के बाहर हुई करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की हत्या और शहर में लगातार पैर पसारते जा रहे संगठित अपराध के विरोध में आज अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। शुक्रवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा आहूत ‘जमशेदपुर बंद’ का सुबह से ही लौहनगरी के चप्पे-चप्पे पर व्यापक और ऐतिहासिक असर देखा जा रहा है। बंद को सफल बनाने और सोए हुए तंत्र को जगाने के लिए भाजपा, आजसू और एनडीए के हजारों कार्यकर्ता सुबह से ही झंडे और बैनर लेकर सड़कों पर उतर आए।

साकची से मानगो तक थमी रफ्तार; स्वतः स्फूर्त बंद रहे प्रतिष्ठान

सुबह की शुरुआत होते ही एनडीए के कद्दावर नेताओं और जांबाज कार्यकर्ताओं की टोलियां शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय हब में सक्रिय हो गई। साकची, बिष्टुपुर, जुगसलाई, मानगो, गोलमुरी, बर्मामाइंस और टेल्को जैसे घनी आबादी और बड़े व्यापारिक केंद्रों में बंद का शत-प्रतिशत असर देखा गया। कार्यकर्ताओं ने जब मुख्य बाजारों में जुलूस निकाला, तो कई स्थानों पर खुली इक्का-दुक्का दुकानों के संचालकों से बेहद शांतिपूर्ण और शालीन तरीके से दुकानें बंद करने का आग्रह किया गया। हिमांशु सिंह की मौत से दुखी और डरे शहर के अधिकांश व्यापारियों ने इस बंद को अपना स्वतः स्फूर्त नैतिक समर्थन दिया और स्वेच्छा से शटर गिराए रखे, जिससे बाजारों में पूरी तरह मातमी सन्नाटा पसरा रहा।

साकची और रीगल गोलचक्कर पर महा-प्रदर्शन; हेमंत सरकार पर तीखा हमला

शहर के हृदय स्थल साकची गोलचक्कर और बिष्टुपुर बाजार समेत अन्य प्रमुख चौराहों पर एनडीए कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम एकत्र हुआ।जलती मशालों और तख्तियों के साथ प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन के खिलाफ गगनभेदी नारेबाजी की।प्रदर्शनकारी नेताओं ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हिमांशु सिंह हत्याकांड ने जमशेदपुर के सुरक्षित होने के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। शहर में लगातार हो रही हत्याएं, दिनदहाड़े लूट, डकैती और महिलाओं के साथ छिनतई (स्नैचिंग) की घटनाओं से आम नागरिकों, उद्योगपतियों और व्यापारियों के भीतर गहरे खौफ और असुरक्षा का माहौल बन गया है।#एनडीए की मुख्य मांगें एनडीए नेताओं ने दोटूक कहा कि जब तक हिमांशु हत्याकांड के पर्दे के पीछे बैठे असली मास्टरमाइंड और सभी फरार शूटरों की अविलंब गिरफ्तारी नहीं होती, और शहर की पुलिसिंग को दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।

छावनी में तब्दील हुई लौहनगरी; चप्पे-चप्पे पर दंडाधिकारी तैनात

इधर, हाल ही में सूबे के मुख्यमंत्री द्वारा जमशेदपुर एसएसपी और सरायकेला एसपी को हटाए जाने के बाद, नए प्रशासनिक अमले के लिए यह बंद पहली और सबसे बड़ी परीक्षा थी। बंद के दौरान किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक, हिंसक या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस हेडक्वार्टर पूरी तरह हाई अलर्ट पर रहे। संवेदनशील इलाकों, चौक-चौराहों, धार्मिक स्थलों और सरकारी संपत्तियों के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स, जिला बल और भारी संख्या में दंडाधिकारियों को तैनात किया गया था। नए सिटी एसपी और एएसपी खुद लगातार पीसीआर वाहनों के काफिले के साथ विभिन्न रूटों पर गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते नजर आए।

आवश्यक सेवाएं रहीं बहाल, शांतिपूर्ण रहा आंदोलन

बंद के कारण सुबह से ही सड़कों पर ऑटो, बसें और व्यावसायिक वाहनों का परिचालन आंशिक रूप से प्रभावित रहा, जिससे राहगीरों को थोड़ी असुविधा जरूर हुई। हालांकि, एनडीए ने पहले ही साफ कर दिया था कि एम्बुलेंस, दवा दुकानें, अस्पताल, स्कूल बसें और दूध-पानी जैसी आवश्यक आपातकालीन सेवाओं को बंद से पूरी तरह मुक्त रखा जाएगा, जिसका कड़ाई से पालन हुआ।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, खबर लिखे जाने तक पूरे जमशेदपुर शहर में बंद पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा और कहीं से भी किसी अप्रिय या हिंसक झड़प की सूचना नहीं है। नए अधिकारियों की टीम और साइबर सेल सोशल मीडिया की अफवाहों पर भी पैनी नजर बनाए हुए हैं।

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