जमशेदपुर: परसुडीह अपहरण और जानलेवा हमला मामले में पीड़ित का आरोप, केस वापस लेने के लिए मिल रही धमकियां

जमशेदपुर के परसुडीह थाना क्षेत्र में 17 जून को हुए कथित अपहरण और जानलेवा हमले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि मामले के मुख्य आरोपी अब उन पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि शिकायत और एसएसपी से गुहार लगाने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

अपहरण के बाद जानलेवा हमला, एक आंख गंभीर रूप से घायल

पीड़ित के अनुसार, 17 जून की रात कन्वाई चालक का कथित तौर पर अपहरण कर उसे स्कूटी से कई स्थानों पर घुमाया गया। इसके बाद चापड़, लोहे के पंच और बोल्डर से उस पर हमला किया गया।हमले में पीड़ित की एक आंख गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। पहले उसे एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए रिम्स, रांची रेफर किया गया। वर्तमान में उसका इलाज रिम्स में जारी है।

आरोपियों पर केस वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार केस वापस लेने की धमकी दे रहे हैं।परिवार के अनुसार, बीती आधी रात विवेक, आयुष समेत करीब 10 अन्य युवक उनके घर पहुंचे और जमकर उत्पात मचाया। आरोप है कि हमलावरों ने घर में तोड़फोड़ की तथा सीसीटीवी कैमरे, घरेलू सामान और वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया।

स्थानीय लोगों के पहुंचने पर आरोपी फरार

परिजनों के मुताबिक, शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी अपनी एक स्कूटी घटनास्थल पर छोड़कर फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने उक्त स्कूटी पुलिस के हवाले कर दी।

पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप

बस्तीवासियों का आरोप है कि सूचना देने के करीब दो घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि मौके पर पहुंचे कुछ पुलिसकर्मी नशे की हालत में थे।हालांकि, इन आरोपों की पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सीसीटीवी फुटेज जांच में हो सकता है अहम साक्ष्य

पीड़ित पक्ष का कहना है कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई है और यह फुटेज जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है।परसुडीह थाना पुलिस ने दोनों पक्षों के आवेदन के आधार पर अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित परिवार ने सुरक्षा की मांग की

पीड़ित परिवार का कहना है कि एसएसपी से शिकायत करने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका दावा है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में रह रहा है।

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