जाति प्रमाण पत्र की प्रक्रिया सरल करने की मांग, तेली साहू महासंगठन का जमशेदपुर उपायुक्त कार्यालय में प्रदर्शन

जमशेदपुर। राष्ट्रीय तेली साहू महासंगठन, पूर्वी सिंहभूम के बैनर तले शुक्रवार को बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इसके बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए जाति प्रमाण पत्र जारी करने की वर्तमान प्रक्रिया को सरल बनाने और तेली समाज से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की।

दस्तावेजी जटिलताओं से हो रही परेशानी

महासंगठन के जिला अध्यक्ष राकेश साहू ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के कारण ओबीसी और ईबीसी वर्ग में शामिल तेली समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि कई योग्य छात्र-छात्राएं, युवा और जरूरतमंद परिवार केवल दस्तावेजी जटिलताओं की वजह से छात्रवृत्ति, आरक्षण, सरकारी नौकरियों और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग

ज्ञापन में कहा गया कि पहले परिवार के किसी एक सदस्य के पास जारी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर अन्य सदस्यों का प्रमाण पत्र आसानी से बन जाता था, लेकिन अब इस व्यवस्था को मान्यता नहीं मिलने से लोगों को बार-बार नए दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं।संगठन ने यह भी बताया कि पुराने खतियान और भूमि संबंधी दस्तावेजों में जाति का उल्लेख नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदकों के आवेदन लंबित हैं।

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समस्या

महासंगठन के अनुसार, जमशेदपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में कई परिवार टाटा स्टील, सरकारी या लीज की जमीन पर निवास करते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अनेक परिवारों के पास अपना खतियान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मौजूदा नियमों के कारण हजारों लोगों को जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा है।

सरकार से प्रमुख मांगें

संगठन ने सरकार से निम्नलिखित मांगें रखीं—

परिवार के पहले से जारी जाति प्रमाण पत्र को नए प्रमाण पत्र के लिए वैध आधार माना जाए।
जिन परिवारों के पास खतियान नहीं है, उनके लिए आधार कार्ड और समाज की अनुशंसा को पर्याप्त दस्तावेज माना जाए।
टाटा स्टील की भूमि पर रहने वाले परिवारों और संगठन की अनुशंसा के आधार पर भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
पिता की सर्विस बुक, पेंशन रिकॉर्ड, मतदाता सूची और विद्यालय के प्रमाण पत्र में दर्ज “तेली” जाति को प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
सभी अंचलों में विशेष शिविर लगाकर 15 दिनों के भीतर लंबित आवेदनों का निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद

महासंगठन ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार समाज की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाएगी, ताकि पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं, शिक्षा और रोजगार से जुड़े लाभ समय पर मिल सकें।

More From Author

जमशेदपुर: दवा लेकर लौट रही बुजुर्ग महिला से लूटपाट, विरोध करने पर पीटा व दबाया गला

सरायकेला में भीषण सड़क हादसा, अज्ञात ट्रक की टक्कर से ‘ऑल्टो बाबा’ की मौत