आदित्यपुर: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत एस टाईप चौक पर रविवार को चिलचिलाती दोपहर में अवैध फुटपाथी दुकानों पर बुलडोजर चला दिया गया। करीब पांच दशक से यहां व्यवसाय कर रहे दर्जनों दुकानदारों की दुकानों को बिना किसी पूर्व सूचना के ध्वस्त कर दिया गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
प्रशासन और नगर निगम की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यह कार्रवाई आखिर किसके निर्देश पर की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक अभियान चलाया गया और न ही आदित्यपुर नगर निगम ने इसकी जिम्मेदारी ली।ऐसे में पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
शम्भुनाथ सिंह पर लग रहे आरोप
दुकानदारों द्वारा इस कार्रवाई के पीछे समाजसेवी और प्रभावशाली व्यक्ति शम्भुनाथ सिंह का नाम लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अतिक्रमण स्थल के पीछे उनकी जमीन स्थित है, जहां वेयर हाउस का निर्माण किया गया है।दुकानदारों का आरोप है कि वेयर हाउस तक आने-जाने के लिए रास्ता नहीं होने के कारण फुटपाथी दुकानदार उन्हें परेशान कर रहे थे और इसी वजह से यह कार्रवाई करवाई गई।
पहले भी चला था नगर निगम का अभियान
बताया जा रहा है कि पिछले दिनों नगर निगम द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के पीछे भी इसी दबाव की चर्चा थी। हालांकि उस समय निगम ने सर्विस रोड के नाले को आधार बनाकर सीमित कार्रवाई की थी और बाद में अभियान रोक दिया गया था। दुकानदारों ने तब राहत की सांस ली थी, लेकिन रविवार को अचानक हुई बुलडोजर कार्रवाई ने फिर विवाद खड़ा कर दिया है।
चंपाई सोरेन के अनुरोध का भी हुआ जिक्र
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछली कार्रवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चम्पई सोरेन ने उपायुक्त और नगर निगम प्रशासक से गरीब दुकानदारों को न उजाड़ने का अनुरोध किया था।बताया जा रहा है कि उसी अनुरोध के बाद निगम ने नाले के बाहर बनी दुकानों को हटाने के बाद अभियान रोक दिया था।
कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज
रविवार को हुई कार्रवाई के बाद आदित्यपुर में यह मुद्दा अब चर्चा और बहस का विषय बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि अतिक्रमण हटाना जरूरी था, तो क्या बिना नोटिस और बिना प्रशासनिक प्रक्रिया के इस तरह की कार्रवाई उचित है।स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
