जमशेदपुर : दलमा की तराई और पहाड़ियों में शिकार परब की आहट मिलते ही वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। वन्यजीवों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने झारखंड-ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बने चेक नाकों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। इन रास्तों को एक तरह से ‘अभेद्य दुर्ग’ में बदल दिया गया है ताकि कोई भी शिकारी अभयारण्य में प्रवेश न कर सके।
पारंपरिक हथियारों की तस्करी पर पैनी नजर
वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें दिन-रात सड़कों पर मुस्तैद हैं।हर चेक नाके पर गुजरने वाले वाहनों की बारीकी से जांच की जा रही है।प्रशासन का मुख्य ध्यान तीर-धनुष, भाले और जाल जैसे पारंपरिक हथियारों को वन क्षेत्र में ले जाने से रोकना है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ‘आस्था’ की आड़ में वन्यजीवों की हत्या किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सन्नाटे के बीच संतरियों का पहरा
झुलसा देने वाली गर्मी और कड़ी धूप के कारण सुबह 10 बजे के बाद से ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है, लेकिन वन विभाग के जवान अपनी ड्यूटी पर तैनात हैं संवेदनशील इलाकों में वन विभाग के संतरी और गश्ती दल लगातार ‘सर्च ऑपरेशन’ चला रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
वन विभाग ने ग्रामीणों और बाहरी लोगों को कड़ा संदेश दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में हथियारों के साथ या वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते पाया गया, तो उस पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
जनजागरूकता और सुरक्षा का तालमेल
बता दें कि एक ओर जहाँ वन विभाग नुक्कड़ नाटकों और बैठकों के जरिए ग्रामीणों को शिकार न करने के लिए प्रेरित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सीमाओं पर की गई यह किलेबंदी सुरक्षा के दूसरे घेरे के रूप में काम कर रही है। विभाग का लक्ष्य इस वर्ष ‘शून्य शिकार’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
