रांची: अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से एकत्र किए गए चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों और चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन के प्रमुख मनोज मिश्रा ने पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।
‘श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला’
मनोज मिश्रा ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति के सर्वोच्च प्रतीक हैं। ऐसे में यदि राम मंदिर जैसे पवित्र संस्थान से जुड़े दान या भूमि लेन-देन में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार या गबन के आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर भी गंभीर आघात है।उन्होंने कहा कि देशभर के श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई और अटूट श्रद्धा के साथ मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था। ऐसे पवित्र उद्देश्य के लिए प्राप्त धन का एक-एक रुपया जनता की अमानत है।
सीबीआई जांच और सार्वजनिक ऑडिट की मांग
मनोज मिश्रा ने मांग की कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित वित्तीय दस्तावेज, दान अभिलेख और भूमि खरीद-बिक्री से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। आवश्यकता पड़ने पर पूरे मामले का सार्वजनिक ऑडिट भी कराया जाना चाहिए।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
जेएचआरसी प्रमुख ने कहा कि यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता साबित होती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे।
