टाटा स्टील भारत के विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में कर रही दीर्घकालिक निवेश : चैतन्य भानु

जमशेदपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशंस) चैतन्य भानु ने भारत के औद्योगिक विकास, इस्पात उद्योग की संभावनाओं और कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में इस्पात उद्योग के विकास की संभावनाएं अभी भी व्यापक हैं और देश की विकास यात्रा में टाटा स्टील महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत में दीर्घकालिक निवेश कर रही टाटा स्टील

चैतन्य भानु ने कहा कि टाटा स्टील भारत में दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ लगातार निवेश कर रही है। कलिंगानगर में विस्तार के बाद अब नीलांचल इस्पात संयंत्र में भी विस्तार की दिशा में काम किया जा रहा है।इसके अलावा लुधियाना में भी कंपनी की गतिविधियां और डाउनस्ट्रीम निवेश जारी हैं। इन परियोजनाओं के जरिए कंपनी अपने लंबे उत्पादों के पोर्टफोलियो को मजबूत करने के साथ बुनियादी ढांचा, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान दे रही है।

विकसित भारत के लिए सिर्फ ज्यादा स्टील उत्पादन पर्याप्त नहीं

चैतन्य भानु ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल इस्पात उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ ऑटोमेशन को बढ़ावा देना और डेटा व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से परिचालन को बेहतर बनाना भी जरूरी है।उन्होंने कहा कि टाटा स्टील इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही है और भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

विकास के साथ स्थिरता और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर

टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट ने विकास के साथ स्थिरता और सामाजिक जिम्मेदारी को भी कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल बताया।उन्होंने कहा कि कंपनी की विभिन्न परियोजनाओं और सामुदायिक पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य, समावेशिता और सामाजिक विकास के क्षेत्र में लगातार काम किया जा रहा है।

खेल के जरिए युवाओं को मिल रहे अवसर

चैतन्य भानु ने खेल को सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील की विश्वस्तरीय खेल अकादमियों, टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन और अन्य सामुदायिक पहलों के जरिए युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं।कंपनी अपने परिचालन क्षेत्रों में आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और टिकाऊ भविष्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भविष्य की जरूरतों के लिए आज से क्षमता निर्माण जरूरी

उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आज से ही नई प्रक्रियाओं और क्षमताओं का निर्माण करना होगा। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में मौजूद क्षमताओं को एक-दूसरे से जोड़कर सीखने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता है।उनके अनुसार, भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा और टाटा स्टील की वैश्विक आकांक्षाएं एक-दूसरे को मजबूत कर सकती हैं।

स्टील से आगे विनिर्माण और तकनीक में भारत के लिए बड़ी संभावनाएं

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर चैतन्य भानु ने विश्वास जताया कि भारत के सामने अवसर केवल इस्पात उत्पादन तक सीमित नहीं हैं। विनिर्माण, तकनीक, नवाचार और सतत विकास के जरिए देश को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।उन्होंने कहा कि उद्योग और देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए तकनीक, दक्षता, नवाचार और टिकाऊ विकास को साथ लेकर चलना जरूरी होगा।

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