
जमशेदपुर: शहर के सरकारी योजनाओं से जुड़े संवेदकों (ठेकेदारों) ने चरित्र प्रमाणपत्र की वैधता अवधि को लेकर प्रशासन के नए फैसले के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंक दिया है। ठेकेदारों ने इस प्रमाणपत्र की अवधि को एक साल से घटाकर छह माह करने के निर्णय को अव्यवहारिक बताते हुए शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय में दस्तक दी।
डीडीसी को सौंपा मांग पत्र
उपायुक्त की अनुपस्थिति में ठेकेदारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उप विकास आयुक्त को अपनी मांगों से संबंधित एक लिखित ज्ञापन सौंपा। संवेदकों का कहना है कि प्रशासन के इस फैसले से न केवल उनके काम की गति प्रभावित होगी, बल्कि उन पर अनावश्यक मानसिक और आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा।
पहले ही लगानी पड़ती थी एसपी और डीसी ऑफिस की दौड़
ज्ञापन में ठेकेदारों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि एक साल की वैधता वाला कैरेक्टर सर्टिफिकेट बनवाने में ही उन्हें महीनों तक एसपी ऑफिस और डीसी ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे। ठेकेदारों का आरोप है कि प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में पहले ही काफी समय और पैसा खर्च हो जाता है। अब साल में दो बार आवेदन करने से उनका खर्च और परेशानी दोनों दोगुनी हो जाएगी। निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में चरित्र प्रमाणपत्र एक अनिवार्य दस्तावेज है। बार-बार इसके नवीनीकरण के चक्कर में विकास कार्यों के टेंडर प्रभावित होने की आशंका है।
अवधि को पुनः एक साल करने की मांग
संवेदकों ने प्रशासन से मांग की है कि चरित्र प्रमाणपत्र की वैधता अवधि को अचानक छह माह करने के आदेश को वापस लिया जाए और इसे पहले की तरह एक वर्ष के लिए बहाल किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि जब अन्य सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है, तो इस तरह के बदलाव से भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को ही बढ़ावा मिलेगा।डीडीसी ने ठेकेदारों की समस्याओं को सुना और उचित कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों से चर्चा करने का आश्वासन दिया है।
