
चांडिल/कुकड़ू: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल रेंज में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पश्चिम बंगाल की सीमा से आए 12 हाथियों के एक शक्तिशाली दल ने कुकड़ू प्रखंड के सिरुम गांव में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों के इस अचानक हमले से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों को अपनी जान बचाने के लिए पूरी रात जागकर पहरा देना पड़ा।
किसानों की मेहनत पर फिरा पानी: लाखों का नुकसान
हाथियों के दल ने सबसे ज्यादा नुकसान किसान लेड़ा महतो को पहुँचाया है। हाथियों ने उनके खलिहान में धावा बोलकर लगभग 10 क्विंटल धान खा लिया और काफी मात्रा में धान को पैरों तले रौंदकर बर्बाद कर दिया। घर के बाहर रखा करीब डेढ़ क्विंटल टमाटर कुचल दिया। साथ ही खेतों में लगी आलू और टमाटर की लहलहाती फसलों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। खलिहान में रखी धान झाड़ने की मशीन को भी हाथियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया।
ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा, नहीं पहुंची QRT
ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आरोप है कि घटना की सूचना के बावजूद वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम समय पर नहीं पहुँची। अंततः ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके अपनाते हुए मशाल जलाकर, ढोल बजाकर और पटाखों के शोर से हाथियों को गांव से बाहर जंगल की ओर खदेड़ा।
अभी भी जंगल में डटे हैं हाथी
शुक्रवार सुबह वन विभाग की टीम सिरुम गांव पहुँची और नुकसान का जायजा लिया। ग्रामीणों के अनुसार, 12 हाथियों का यह दल अभी भी गांव से महज एक किलोमीटर दूर जंगल में डेरा जमाए हुए है, जिससे दोबारा हमले का डर बना हुआ है। वहीं, चांडिल के कुशपुतुल और गुंडा गांव में एक ‘लोनर’ (अकेला) हाथी भी फसलों को लगातार नुकसान पहुँचा रहा है।
मुआवजे का आंकड़ा: 50 गांवों में दहशत
चांडिल क्षेत्र के लगभग 50 से अधिक गांव वर्तमान में हाथियों की आवाजाही से प्रभावित हैं। वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2024 से अब तक प्रभावित ग्रामीणों के बीच 503 मामलों में कुल 94 लाख रुपये की मुआवजा राशि बांटी जा चुकी है। विभाग का दावा है कि हाथियों की गतिविधियों पर ट्रैकर के जरिए नजर रखी जा रही है, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उन्हें पूरी तरह नियंत्रित करना चुनौती बना हुआ है।
