
धनबाद: 3 जनवरी 1991 की वो सुबह आज भी धनबाद के लोगों के जेहन में ताज़ा है, जब गोलियों की तड़तड़ाहट ने कोयलांचल को दहला दिया था। आज उसी महान सपूत शहीद रणधीर प्रसाद वर्मा का 35वां शहादत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर धनबाद के हीरापुर स्थित ‘रणधीर वर्मा चौक’ पर एक गरिमामय और संगीतमय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहाँ पूरा शहर अपने नायक को नमन करने उमड़ पड़ा।
हीरापुर चौक पर उमड़ी श्रद्धा: SSP और DC ने दी श्रद्धांजलि
हर वर्ष की परंपरा को जीवित रखते हुए इस बार भी शहीद की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. रीता वर्मा की उपस्थिति में श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए, जिनमें SSP प्रभात कुमार और उपायुक्त आदित्य रंजन ने शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें सलामी दी।पद्मश्री से सम्मानित चिकित्सकों सहित जिले के कई गणमान्य व्यक्तियों ने इस ‘वीर गाथा’ को याद किया।संगीतमय श्रद्धांजलि सभा के जरिए देशभक्ति के गीतों ने माहौल को भावुक और गर्व से भर दिया।
वीरगाथा: जब एक रिवाल्वर ने AK-47 का गुरूर तोड़ दिया
3 जनवरी 1991 को पंजाब से आए तीन खालिस्तानी आतंकी धनबाद के हीरापुर स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा को लूटने पहुंचे थे। सूचना मिलते ही तत्कालीन एसपी रणधीर वर्मा बिना अपनी जान की परवाह किए, बुलेटप्रूफ जैकेट के बिना ही मौके पर पहुँच गए। आतंकियों के पास अत्याधुनिक AK-47 थी, जबकि रणधीर वर्मा के पास सिर्फ एक सर्विस रिवाल्वर।आतंकियों की अंधाधुंध फायरिंग में उन्हें 7 गोलियां लगीं, लेकिन इस जांबाज पुलिस अधिकारी ने गिरते-गिरते भी अपनी रिवाल्वर से एक आतंकी को ढेर कर दिया और दूसरे को घायल कर भागने पर मजबूर कर दिया। उनकी वीरता ने न केवल बैंक की संपत्ति बचाई, बल्कि शहर को एक बड़े आतंकी हमले से सुरक्षित किया।
सुपौल से अशोक चक्र तक का सफर
1952 में बिहार के सुपौल में जन्मे रणधीर वर्मा एक निडर अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। धनबाद आने से पहले उन्होंने बेगूसराय जैसे इलाकों में कुख्यात माफिया कामदेव सिंह के साम्राज्य को ध्वस्त किया था।उनकी अद्वितीय वीरता के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ‘अशोक चक्र’ (शांति काल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार) से सम्मानित किया। उनके सम्मान में डाक विभाग ने डाक टिकट भी जारी किया है।
प्रेरणा का स्रोत: नेतृत्व की मिसाल
आज के दौर में जब संकट के समय अक्सर नेतृत्व पीछे रह जाता है, रणधीर वर्मा की कहानी पुलिस बल के लिए एक जीवंत मिसाल है। उनकी पत्नी प्रो. रीता वर्मा ने उनके बलिदान के बाद सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में देश की सेवा की।
