
जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग द्वारा मंगलवार को “शैक्षणिक संस्थानों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता : स्मार्ट शिक्षण, अधिगम एवं अनुसंधान के लिए एआई का उपयोग” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। वर्तमान समय में शैक्षणिक नवाचारों की दिशा में इस कार्यक्रम को एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।
हाइब्रिड मोड में देशभर के 10 संस्थानों की सहभागिता
इस राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हाइब्रिड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) माध्यम से किया गया। इसमें जमशेदपुर सहित देश के विभिन्न राज्यों के 10 से अधिक प्रतिष्ठित संस्थानों के लगभग 250 विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक AI उपकरणों से परिचित कराना और उनके व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना था।
“एआई अब विकल्प नहीं, अनिवार्य आवश्यकता” – प्रो. गौतम सुत्रधार
कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) गौतम सुत्रधार, उपनिदेशक प्रो. राम विनय शर्मा और अधिष्ठाता (अनुसंधान एवं परामर्श) प्रो. सतीश कुमार ने किया।
प्रो. सुत्रधार ने अपने संबोधन में कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।गणमान्य अतिथियों ने शिक्षण पद्धतियों और शोध में एआई के प्रभावी एकीकरण पर विशेष बल दिया।
दिग्गज वक्ताओं ने साझा किए विचार
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में देश के जाने-माने शिक्षाविदों ने अपने व्याख्यान दिए।प्रो. दीपक गर्ग (कुलपति, एसआर विश्वविद्यालय) ने एआई के भविष्य और इसके वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की।प्रो. अंकुश मित्तल (कुलपति, गलगोटियास विश्वविद्यालय) ने अकादमिक उत्कृष्टता में एआई की भूमिका को रेखांकित किया वहीँ एनआईटी जमशेदपुर के विशेषज्ञ: डॉ. दिवाकर त्रिपाठी और डॉ. दीपक राय ने ‘एआई-सक्षम शिक्षण’ और ‘बुद्धिमान मूल्यांकन प्रणालियों’ पर विस्तृत तकनीकी जानकारी साझा की।
नैतिक निर्णय और डेटा सुरक्षा पर चर्चा
कार्यशाला का एक मुख्य उद्देश्य शोधकर्ताओं को डेटा-आधारित नैतिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी था। डॉ. जितेश प्रधान, डॉ. बी. आर. रेड्डी और डॉ. दीपक राय के कुशल समन्वय में आयोजित इस कार्यक्रम ने शैक्षणिक संस्थानों के बीच आपसी सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान के नए द्वार खोले हैं।
