जमशेदपुर में ‘खुचरे’ का संकट: ₹10-20 के लिए तरस रहे दुकानदार; चेंबर और बैंकों ने संभाला मोर्चा, RBI से 45 लाख के सिक्कों की मांग

जमशेदपुर : लौहनगरी में विगत तीन महीनों से सिक्कों और छोटे नोटों की किल्लत अब “घोर संकट” में बदल चुकी है। पिछले दो सप्ताह से स्थिति इतनी विकराल हो गई है कि ₹10 और ₹20 के नोट बाजार से लगभग गायब दिख रहे हैं। इसका सीधा असर फुटपाथ विक्रेताओं से लेकर बड़े शोरूम तक पड़ रहा है।

दुकानदारों की जुबानी: सामान बिक रहा, पर पैसा नहीं बच रहा

बाजार की इस समस्या ने छोटे व्यापारियों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा कर दिया है।

फल दुकानदार राम ने कहा “पहले जैसे-तैसे जुगाड़ हो जाता था, लेकिन अब ₹10-20 का सिक्का ढूंढना नामुमकिन लग रहा है। ग्राहक सामान पसंद करता है, लेकिन खुचरा न होने पर सामान छोड़कर वापस चला जाता है। हमें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।”

सत्तू-भुजा दुकानदार बिट्टू ने कहा “मेरी दुकान में अधिकतर बिक्री ही ₹10-20 की होती है। अब ग्राहक ₹10 का सामान लेकर ₹100 का नोट थमा देता है। मजबूरी में उधारी देनी पड़ रही है, जिससे आमदनी अटक गई है।”

चेंबर ऑफ कॉमर्स की पहल: ‘पहले आओ-पहले पाओ’

सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स इस समस्या को सुलझाने के लिए लगातार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के संपर्क में है। चेंबर अध्यक्ष मानव केडिया और ट्रेड ऑफ कॉमर्स के सचिव भरत मकानी ने बताया कि पिछले तीन महीनों में ₹45 लाख के सिक्के (1, 2, 5, 10, 20 रुपये) वितरित किए जा चुके हैं।मौजूदा संकट को देखते हुए चेंबर ने RBI से ₹10 के 25 लाख, ₹20 के 10 लाख और ₹5 के 10 लाख रुपयों के सिक्कों की अतिरिक्त मांग की है। व्यापारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से सूचित किया जाता है। प्रति व्यक्ति न्यूनतम ₹5000 और अधिकतम ₹10,000 तक के सिक्के दिए जा रहे हैं।

बैंकों का प्रयास: SBI लगा रहा है कैंप

व्यापारियों के अलावा शहर के बैंक भी इस समस्या से निपटने में जुटे हैं।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया प्रतिदिन करीब ₹4 लाख के खुचरे का वितरण कर रहा है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि वे न केवल खाताधारकों बल्कि गैर-खाताधारकों को भी यह सुविधा दे रहे हैं। जल्द ही विभिन्न क्षेत्रों में ‘कॉइन कैंप’ (सिक्का वितरण शिविर) लगाकर समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

क्यों गायब हो गया ‘खुचरा’?

बाजार के जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस किल्लत के पीछे दो मुख्य कारण हो सकते हैं। डिजिटल लेनदेन बढ़ने से बाजार में छोटे नोटों का चक्र धीमा पड़ गया है।बैंकों द्वारा भारी मात्रा में सिक्के जारी किए जाने के बावजूद बाजार में उनकी कमी “जमाखोरी” की ओर इशारा करती है। कुछ लोग भविष्य की किल्लत के डर से सिक्कों को डंप कर रहे हैं।

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