अर्जुन अवार्डी और शॉटपुट के ‘भीष्म पितामह’ बलविंदर सिंह बाबा धालीवाल का निधन

जमशेदपुर। भारतीय खेल जगत के लिए एक अत्यंत दुखद खबर है। लगातार दस वर्षों तक शॉटपुट (गोला फेंक) में राष्ट्रीय चैंपियन रहे और टाटा स्टील के पूर्व स्पोर्ट्स ऑफिसर बलविंदर सिंह ‘बाबा धालीवाल’ (68 वर्ष) का मंगलवार को चंडीगढ़ के लिवासा अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से फेफड़े के कैंसर (लंग कैंसर) से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही देश के खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में शोक की लहर दौड़ गई है।

शॉटपुट की दुनिया में स्वर्णिम सफर

बाबा धालीवाल का नाम भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 1981 से 1992 तक शॉटपुट में उनका एकछत्र राज रहा। उनकी प्रमुख उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

1981-1992: लगातार राष्ट्रीय चैंपियन।

1983: पंजाब सरकार द्वारा ‘महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार’ से सम्मानित।

1985: एथलेटिक विश्व कप में एशियाई वर्ग में छठा स्थान हासिल किया।

1986: 18.88 मीटर के शानदार थ्रो के लिए एशिया महाद्वीप पुरस्कार मिला।

1987: खेल जगत का प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार’ प्रदान किया गया।

1988: उनका नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हुआ।

कोच के रूप में खिलाड़ियों को संवारा

टाटा स्टील से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका खेलों से जुड़ाव बना रहा। वे स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया , एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया और पंजाब यूनिवर्सिटी के माध्यम से उभरते खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे थे। वर्तमान में वे चंडीगढ़ में अपनी स्पोर्ट्स अकादमी चला रहे थे। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित लगभग 20 से 25 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है।

जमशेदपुर में शोक की लहर

बाबा धालीवाल का जमशेदपुर से गहरा नाता रहा, जहाँ उन्होंने टाटा स्टील के खेल विभाग में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। उनके निधन पर शहर की विभिन्न हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रणजीत सिंह और टाटा स्टील खेल विभाग के पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह, अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह, साकची गुरुद्वारा प्रधान निशान सिंह, कौमी सिख मोर्चा के अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह और युवा नेता सतबीर सिंह सोमू ने इसे अपूरणीय क्षति बताया।

अंतिम संस्कार और रस्म क्रिया

उनके पुत्र परमजीत सिंह ने बताया कि उनकी बेटी हरमन कौर मंगलवार को इंग्लैंड से चंडीगढ़ पहुँच रही हैं।अंतिम संस्कार 3 जून को चंडीगढ़ के सेक्टर-25 स्थित बर्निंग घाट में किया जाएगा। गुरुद्वारा साहिब में सहज पाठ रखा जाएगा, जिसका भोग 10 जून को आयोजित होगा। बाबा धालीवाल का जाना केवल एक खिलाड़ी का जाना नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। उनके द्वारा तैयार किए गए खिलाड़ी आज भी मैदान पर उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। ‘प्रयत्न’ और शहर की अन्य संस्थाओं ने भी उन्हें नमन किया है।

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