चाकुलिया: सिमदी में आस्था का कठिन इम्तिहान, भोक्ताओं ने जीभ और पीठ में कील घोंप कर की चड़क पूजा

चाकुलिया : चाकुलिया के सिमदी गांव में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार चड़क पूजा धूमधाम से संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। चड़क पूजा में भोक्ताओं (व्रतियों) द्वारा किए गए साहसिक और हैरतअंगेज अनुष्ठानों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कठिन साधना और भक्ति के विविध रूप

पूजा की शुरुआत तालाब में पवित्र स्नान के साथ हुई, जिसके बाद भोक्ताओं ने अपनी भक्ति का परिचय दिया। तपती दोपहरी में कई भोक्ता जमीन पर लोटते हुए (दंडवत) मंदिर पहुंचे, तो कुछ ने कांटों की शैय्या पर लेटकर अपनी आस्था प्रकट की। ‘जीभ फोड़’ और ‘रजनी फोड़’ अनुष्ठान के दौरान भोक्ता गोपाल चंद्र नायक ने अपने शरीर में 151 और मनोरंजन नायक ने 108 आलपीन घोंप कर भगवान शिव की विशेष पूजा की।

35 फीट की ऊंचाई पर ‘उड़ान’

चड़क पूजा का मुख्य आकर्षण ‘चड़क पेड़’ पर भोक्ताओं का उड़ना रहा।अपनी पीठ की खाल में लोहे की कील (हूक) घोंपकर कई भोक्ता 35 फुट ऊंचे लकड़ी के ढांचे पर बंधकर हवा में उड़े।इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। भक्तों के बीच कमेटी द्वारा प्रसाद का भी वितरण किया गया।

पूजा कमेटी की सक्रिय भूमिका

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में चड़क पूजा कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मौके पर संरक्षक कोकिल चंद्र महतो, भवतारण महतो, अध्यक्ष मनोज कुमार महतो, सचिव अनूप कुमार महतो, कोषाध्यक्ष धनंजय महतो सहित सुबोध हांसदा, निर्मल नायक और सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।

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