जमशेदपुर : लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने झारखंड में सरकारी नियुक्तियों को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की मांग करते हुए राज्य सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे हैं। मोर्चा का कहना है कि वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठते विवादों के कारण अभ्यर्थियों का भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा लगातार कम हुआ है। ऐसे में आयोगों की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार समय की आवश्यकता है।
जेपीएससी और जेएसएससी के अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए उच्चस्तरीय चयन समिति बनाने की मांग
जेकेएलएम ने मांग की है कि झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक उच्चस्तरीय चयन समिति का गठन किया जाए।मोर्चा के प्रस्ताव के अनुसार समिति में न्यायपालिका का एक प्रतिनिधि,कार्यपालिका का एक प्रतिनिधि,विधायिका का एक प्रतिनिधि शामिल हो,जबकि समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करें।मोर्चा का मानना है कि इससे आयोगों की नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी।
जेपीएससी की वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग
जेकेएलएम ने संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत गठित झारखंड लोक सेवा आयोग की वर्तमान व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कराने की भी मांग उठाई है।मोर्चा का कहना है कि आयोग के गठन के बाद आयोजित अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाएं किसी न किसी कारण से विवादों में रही हैं, जिससे युवाओं का विश्वास प्रभावित हुआ है। ऐसे में आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त लोक सेवा आयोग के गठन की संभावना पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
यूपीएससी की कार्यप्रणाली अपनाने का सुझाव
मोर्चा ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में यूपीएससी की कार्यप्रणाली, तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम मानकों को अपनाया जाए।जेकेएलएम का कहना है कि इससे परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेगी तथा परीक्षा से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी।
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
मोर्चा ने राज्य सरकार से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करने, भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की है।जेकेएलएम का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार लागू होने से लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम होगा और झारखंड में योग्यता आधारित एवं पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
