जमशेदपुर : शहर के निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन और रीबिल्डिंग फंड के नाम पर ली जा रही कथित अवैध फीस के खिलाफ झारखंड शिक्षा उत्थान समिति (महानगर इकाई) ने बिगुल फूंक दिया है। शुक्रवार को सीतारामडेरा में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान समिति ने अपने आगामी ‘जनआंदोलन’ की विस्तृत रूपरेखा साझा की।
आर्थिक शोषण का आरोप
समिति के प्रतिनिधि क्रांति सिंह ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि जमशेदपुर के कई निजी स्कूल शिक्षा को व्यापार बना चुके हैं।स्कूलों द्वारा री-एडमिशन और बिल्डिंग फंड जैसे उन मदों में पैसे वसूले जा रहे हैं, जो पूरी तरह तर्कहीन और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ हैं।उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में स्कूलों की ये ‘मनमानी’ मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ रही है।
आंदोलन का इतिहास: लाठीचार्ज और एफआईआर का जिक्र
क्रांति सिंह ने समिति के पुराने संघर्षों को याद करते हुए प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
2008 का संघर्ष: समिति ने जब पहली बार आवाज उठाई थी, तब प्रशासन ने स्कूलों का पक्ष लेते हुए आंदोलनकारियों पर एफआईआर दर्ज कर दी थी।
2013 का लाठीचार्ज: डीईओ कार्यालय की तालाबंदी के दौरान हुए पुलिसिया लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दमन के बावजूद समिति पीछे नहीं हटी है।
‘मिशन 40,000’: कैसे होगा विरोध?
समिति ने इस बार आंदोलन को और अधिक संगठित और व्यापक बनाने के लिए कई चरणों की योजना बनाई है। शहर के विभिन्न बस्तियों और चौक-चौराहों पर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से अभिभावकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस अभियान के जरिए 40 हजार अभिभावकों को एक मंच पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।आंदोलन को राज्य स्तर तक ले जाने के लिए जमशेदपुर से रांची तक पैदल मार्च निकालने की योजना है, जिसके बाद मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
जनसमर्थन का दावा
समिति का दावा है कि इस बार अभिभावक चुप नहीं रहेंगे। सोशल मीडिया और स्थानीय बैठकों के माध्यम से लोग स्वतः स्फूर्त तरीके से जुड़ रहे हैं। समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं लगाता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
