जमशेदपुर: 400 करोड़ का आधुनिक ‘एमजीएम’ खुद पड़ा बीमार; गंदगी का अंबार, फेल ड्रेनेज और असुरक्षित लिफ्ट के बीच जान जोखिम में डाल रहे मरीज

जमशेदपुर (आनंद राव): शहर के प्रतिष्ठित महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के नए भवन को लेकर सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन उद्घाटन के डेढ़ साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव इसकी पोल खोल रहा है। बाहर से चकाचौंध दिखने वाला यह अस्पताल अंदर से खोखला साबित हो रहा है, जहाँ अव्यवस्था ही सबसे बड़ी व्यवस्था बन गई है।

ड्रेनेज फेल: डेंगू और मलेरिया को दावत

अस्पताल में स्वच्छता और सफाई के दावों की हवा ड्रेनेज सिस्टम ने निकाल दी है। ओपीडी पंजीकरण विभाग के पास गंदा पानी जमा है। निकासी की सही व्यवस्था न होने से ड्रेन ओवरफ्लो हो रहा है, जो महामारी का रूप ले सकता है। इलाज कराने आए मरीजों के लिए यह गंदा पानी खतरे की घंटी है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

वीआईपी स्टाफ शौचालय बनाम बदहाल सार्वजनिक शौचालय

अस्पताल में सुविधाओं के वितरण में भी भेदभाव साफ नजर आता है। स्टाफ के लिए बने शौचालय तो चकाचौंध हैं, लेकिन आम जनता और मरीजों के लिए बने शौचालयों की स्थिति दयनीय है। नल चोरी हो जाने के कारण पानी बंद है, जिससे गंदगी और दुर्गंध ने परिजनों का जीना मुहाल कर रखा है।

दिखावे की लिफ्ट: गंभीर मरीज पैदल चलने को मजबूर

अस्पताल में 15 से ज्यादा लिफ्ट लगाई गई हैं, लेकिन इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा। अधिकतर लिफ्ट सीधे तीसरी मंजिल से सातवीं मंजिल पर रुकती हैं। बीच के तलों पर जाने के लिए गंभीर मरीजों को भी उनके परिजन पैदल ले जाने को मजबूर हैं।लिफ्ट ऑपरेटर की बहाली न होने से परिजन खुद ही लिफ्ट ऑपरेट कर रहे हैं, जिससे तकनीकी खराबी और दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।

सुरक्षा में बड़ी चूक: 200 की जगह सिर्फ 90 सुरक्षाकर्मी

अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था का हाल यह है कि यहाँ तैनात बल अपनी क्षमता से आधे से भी कम है।स्वीकृत 200 पदों के मुकाबले केवल 90 सुरक्षाकर्मी ही पूरी बिल्डिंग की सुरक्षा संभाल रहे हैं। पिछले 5 महीनों में ऊंचे तलों से कूदकर गंभीर मरीजों द्वारा जान देने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रबंधन अब भी ठोस सुरक्षा उपाय करने के बजाय किसी बड़ी घटना का इंतजार करता जान पड़ता है।

एप्रोच रोड का बुरा हाल: गड्ढों में स्वास्थ्य व्यवस्था

हैरानी की बात यह है कि 400 करोड़ के इस भव्य प्रोजेक्ट में अस्पताल तक पहुँचने के लिए एक अच्छी एप्रोच रोड तक नहीं है। मरीज और एम्बुलेंस गड्ढों से भरी ऊबड़-खाबड़ सड़क से होकर अस्पताल पहुँचते हैं, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज की जान के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।

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