जमशेदपुर। करीम सिटी कॉलेज के हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित “अतिथि व्याख्यान” में कबीरदास के दार्शनिक और सामाजिक पहलुओं पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य विषय “कबीर की सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना” रहा, जिसमें कॉलेज के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों और छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कबीर और गंगा-जमुनी तहजीब
मुख्य वक्ता के रूप में बिहार के एस.पी. जैन कॉलेज (सासाराम) के पूर्व प्राचार्य डॉ. गुरुचरण सिंह उपस्थित थे। उन्होंने अपने व्याख्यान में कबीरदास की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए निम्नलिखित बिंदु साझा किए। डॉ. सिंह ने बताया कि कबीर का साहित्य आज के दौर में भी गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखने के लिए सबसे प्रभावी माध्यम है।उन्होंने कबीर के निर्गुण पंथ और उनकी आध्यात्मिक चेतना को सरल शब्दों में विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया।
विषय प्रवेश और विभागीय भागीदारी
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र गुप्ता की देखरेख में हुई। सत्र की शुरुआत और अतिथि स्वागत के साथ-साथ विषय प्रवेश विभाग की प्राध्यापिका डॉ. संध्या सिन्हा ने किया। डॉ. अनुपमा मिश्रा (उड़िया विभागाध्यक्ष) ने कार्यक्रम की विषय वस्तु और कबीर के वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला।इतिहास विभाग के डॉ. कौसर तसनीम (विभागाध्यक्ष) ने कबीरकालीन भारत और उनके क्रांतिकारी विचारों के ऐतिहासिक महत्व पर अपने विचार रखे।
छात्रों के साथ संवाद
व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तरसत्र का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने कबीरदास की रचनाओं, उनकी भाषा और उनके द्वारा समाज में किए गए बदलावों से संबंधित कई प्रश्न पूछे। मुख्य वक्ता डॉ. गुरुचरण सिंह ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें कबीर के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. संध्या सिन्हा ने किया। अंत में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. फिरोज आलम ने पूरे सत्र का सारांश प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों व प्रतिभागियों का आभार जताते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
