जमशेदपुर के ऊपर दहाड़े ‘सुखोई SU 30-MKI’: वायुसेना ने की आधिकारिक पुष्टि; जानें क्यों भरी थी नीची उड़ान

जमशेदपुर: शहरवासियों के बीच कल से बने कौतूहल पर अब विराम लग गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गुरुवार को जमशेदपुर के आसमान में नजर आने वाले लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के सबसे शक्तिशाली विमानों में से एक सुखोई SU 30-MKI थे। इन विमानों ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन से उड़ान भरी थी।

टैक्टिकल ट्रेनिंग सॉर्टी’ का हिस्सा थी उड़ान

वायुसेना के आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि यह नियमित टैक्टिकल ट्रेनिंग सॉर्टी थी। इस अभ्यास के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं।जेट्स को कम ऊंचाई पर इसलिए उड़ाया गया ताकि पायलट लो-एल्टीट्यूड फ्लाइंग’ का अभ्यास कर सकें। यह तकनीक दुश्मनों के रडार की नजर से बचने के लिए बेहद कारगर होती है। इस ड्रिल का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य जमीन पर मौजूद किसी भी लक्ष्य को बिना रडार की पकड़ में आए सटीक तरीके से भेदने का अभ्यास करना था। कलाईकुंडा एयरबेस वायुसेना का एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र है, जहाँ पायलटों को युद्ध जैसी स्थितियों के लिए तैयार किया जाता है।

सुखोई SU 30-MKI: आसमान का सिकंदर

जिस सुखोई विमान ने जमशेदपुर के ऊपर चक्कर लगाए, वह भारतीय रक्षा पंक्ति की रीढ़ माना जाता है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं। यह फाइटर जेट 3000 किलोमीटर की दूरी तक जाकर दुश्मन पर हमला करने में सक्षम है। वायुसेना की योजना भविष्य में इन विमानों को अत्याधुनिक लेजर बमों से लैस करने की है, जिससे इनकी मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

शहर में चर्चा का विषय

यद्यपि यह एक नियमित अभ्यास था, लेकिन शहर के ऊपर सुखोई जैसे भारी-भरकम विमानों की नीची उड़ान ने स्थानीय लोगों को रोमांचित कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि जमशेदपुर की भौगोलिक स्थिति और कलाईकुंडा से इसकी नजदीकी के कारण इस क्षेत्र का उपयोग अक्सर ‘नेविगेशन ट्रेनिंग’ के लिए किया जाता है।वायुसेना की इस पुष्टि ने किसी भी प्रकार की आशंका को दूर कर दिया है। यह अभ्यास न केवल हमारे पायलटों की दक्षता को बढ़ाता है, बल्कि देश की सुरक्षा तैयारियों की मजबूती को भी दर्शाता है।

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