
जमशेदपुर।सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर में बुधवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार द्वारा समर्थित उत्कृष्टता केंद्र के तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।कार्यक्रम का विषय था – “जंग और घर्षण रोधी कोटिंग प्रौद्योगिकी”, जिसमें क्षेत्र के माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) और सहयोगी उद्योगों के 35 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में सतह अभियांत्रिकी, जंग रोधी तकनीक और घर्षण कम करने वाली उन्नत कोटिंग प्रौद्योगिकियों के प्रति जागरूकता, तकनीकी ज्ञान और कौशल विकास को बढ़ावा देना था।प्रतिभागियों को नवीनतम औद्योगिक प्रक्रियाओं, सामग्री चयन, प्रदर्शन मूल्यांकन और औद्योगिक अनुप्रयोगों पर जानकारी दी गई, जिससे औद्योगिक उपकरणों और कॉम्पोनेंट्स की टिकाऊपन एवं विश्वसनीयता में वृद्धि की जा सके।
तकनीकी सत्रों की प्रमुख विषय-वस्तु
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने जंग की प्रक्रियाओं के मूल सिद्धांतों पर ,सतह अभियांत्रिकी एवं कोटिंग तकनीकों (जैसे इलेक्ट्रोप्लेटिंग, हॉट-डिप गैल्वनाइजेशन, थर्मल स्प्रे, पीवीडी, सीवीडी आदि) पर,जंग और घर्षण रोधी कोटिंग्स के प्रदर्शन मूल्यांकन की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा कीऔर साथ ही प्रायोगिक प्रदर्शन और प्रयोगशाला भ्रमण के माध्यम से सीएसआईआर–एनएमएल में उपलब्ध उन्नत उपकरणों से परिचय कराया गया।
निदेशक और वैज्ञानिकों के विचार
डॉ. संदीप घोष चौधुरी (निदेशक, एनएमएल) और डॉ. एस. शिवप्रसाद (वरिष्ठतम मुख्य वैज्ञानिक, प्रमुख–एमटीई एवं सलाहकार मानव संसाधन समूह) ने स्वागत भाषण दिया।उन्होंने कहा कि औद्योगिक कॉम्पोनेंट्स की आयु बढ़ाने और उत्पादकता सुधार में उन्नत कोटिंग तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।साथ ही, उन्होंने उद्योग–अनुसंधान सहयोग के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
डीएसटी समर्थित उत्कृष्टता केंद्र की जानकारी
डॉ. रघुवीर सिंह (प्रमुख – उन्नत सामग्री एवं संक्षारण विभाग) ने डीएसटी समर्थित “जंग और घर्षण रोधी कोटिंग प्रौद्योगिकी” उत्कृष्टता केंद्र की गतिविधियों की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि यह केंद्र एमएसएमई और सहयोगी उद्योगों को विशिष्ट तकनीकी चुनौतियों के समाधान हेतु वैज्ञानिक और तकनीकी हस्तक्षेप प्रदान करता है।
प्रेरक व्याख्यान और धन्यवाद ज्ञापन
डॉ. शैलेन्द्र के. झा (कार्यक्रम संयोजक) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।उन्होंने “उद्योग में सतह परिष्करण क्रियाओं एवं इलेक्ट्रोप्लेटिंग की भूमिका” पर व्याख्यान दिया और इलेक्ट्रोप्लेटेड कॉम्पोनेंट्स की समस्याओं के समाधान के व्यावहारिक सुझाव साझा किए।उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण सतह अभियांत्रिकी औद्योगिक उत्पादकता और प्रदर्शन में वृद्धि का प्रमुख कारक है।
प्रायोगिक प्रशिक्षण और प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को इलेक्ट्रोप्लेटिंग, हॉट-डिप कोटिंग, घर्षण परीक्षण, पेंट अनुप्रयोग और जंग विश्लेषण तकनीकें (जैसे पोलराइजेशन, सॉल्ट-स्प्रे और वज़न-हानि परीक्षण) पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।सभी प्रतिभागियों ने इस संवादात्मक और उपयोगी कार्यक्रम की सराहना की तथा सीएसआईआर–एनएमएल द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को दिए जा रहे तकनीकी सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन प्रमाणपत्र वितरण समारोह के साथ हुआ।प्रतिभागियों ने यह आशा व्यक्त की कि इस प्रकार की कार्यशालाएं भविष्य में भी जारी रहेंगी, जिससे उद्योगों और अनुसंधान संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत होगी।
