राष्ट्रहित में सैनिक समागम: झारखंड के 29 पूर्व सैनिक और वीर नारी सूरत रवाना, विकसित भारत 2025 के लिए लेंगे संकल्प

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जमशेदपुर।झारखंड से एक गौरवपूर्ण प्रतिनिधिमंडल आगामी 14 से 16 नवंबर तक गुजरात के सूरत स्थित ग्रीनलैंड रिसॉर्ट में आयोजित होने जा रहे “सैनिक समागम 2025 एवं विकसित भारत 2025”कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना हुआ है। यह आयोजन भारत भारती संस्था द्वारा किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देशभर के पूर्व सैनिकों को राष्ट्रहित में पुनः समाहित करना और विकसित भारत के निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना है।इस विशेष कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से तीनों सेनाओं — थलसेना, नौसेना और वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं जवान शामिल होंगे। इसके साथ ही, भारत के अलग-अलग प्रांतों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं से जुड़े देशभक्त नागरिक भी इस राष्ट्रीय एकता के आयोजन में भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य है — “विविधता में एकता” के भाव को सशक्त करना और विकसित भारत के विजन को साकार करने का संकल्प लेना।झारखंड से इस समागम में कुल 29 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें जमशेदपुर, रांची, बोकारो, धनबाद और गुमला से आने वाले सैनिक एवं वीर नारियां शामिल हैं।इस प्रतिनिधिमंडल में झारखंड के कई सेवानिवृत्त सैनिक और वीर नारियां (शहीद सैनिकों की पत्नियां)राष्ट्रप्रेम और एकता का संदेश लेकर सूरत पहुंचेंगी।

संयोजक मंडल में प्रमुख भूमिका निभाने वाले:

सुशील कुमार सिंह, राजीव रंजन और अनिरुद्ध सिंह इस आयोजन के प्रमुख संयोजक हैं, जो झारखंड प्रतिनिधिमंडल के समन्वय का दायित्व संभाल रहे हैं।

सम्मानित सदस्य के रूप में शामिल होंगे:

पी.एन. राय, भोला प्रसाद सिंह, सतेंद्र सिंह, मनोज झा, एम. पाठक, राजू उपाध्याय, हंसराज सिंह, सहदेव महतो, प्रमोद कुमार दास सहित 15 वीर नारियां भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।इस आयोजन के दौरान देशभर से पहुंचे पूर्व सैनिक एक मंच पर मिलकर यह संकल्प लेंगे कि वे समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम में देशभक्ति, राष्ट्रनिर्माण, युवा प्रेरणा और सैन्य योगदान पर केंद्रित विभिन्न सत्रों का आयोजन भी होगा।

कार्यक्रम का उद्देश्य:

राष्ट्र के प्रति समर्पण और एकता की भावना को सुदृढ़ करना, पूर्व सैनिकों को सामाजिक नेतृत्व की भूमिका में लाना,विकसित भारत के निर्माण हेतु साझा संकल्प लेना,विभिन्न राज्यों और समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहन देना।भारत भारती संस्था के इस प्रयास की देशभर में सराहना की जा रही है। संस्था का मानना है कि सैनिक समाज के सच्चे प्रेरणास्रोत हैं, जिनके अनुभव और अनुशासन से देश के विकास को नई दिशा मिल सकती है।

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