
जमशेदपुर: बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में आयोजित प्रथम पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव केवल शब्दों और किताबों का संगम नहीं, बल्कि कला और संस्कृति के जीवंत प्रदर्शन का केंद्र बन गया है। उत्सव के पहले दिन साहित्य की चर्चाओं के बीच कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं द्वारा निर्मित पेंटिंग और मूर्तिकला ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
कस्तूरबा की छात्राओं के हुनर को मिला बड़ा मंच
उत्सव परिसर में लगे विभिन्न स्टॉलों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं के दो स्टॉल आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।छात्राओं ने अपनी कल्पनाओं को रंगों और मिट्टी के माध्यम से इस खूबसूरती से उकेरा है कि लोग उनकी कला की तुलना पेशेवर कलाकारों से कर रहे हैं।छात्राओं द्वारा प्रदर्शित लाइव ग्लिटर आर्ट (चमकदार कला) को देखने के लिए स्टॉल पर जमशेदपुरवासियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह मंच इन ग्रामीण बेटियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उनके भीतर छिपे वैश्विक स्तर के कलाकार को निखारने का एक सुनहरा अवसर है।
5 मिनट में जीवंत स्केच: नीतू दुबे का कमाल
साहित्य उत्सव का एक और बड़ा आकर्षण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हाइपर-रियलिस्टिक पोर्ट्रेट कलाकार एवं टेड एक्स स्पीकर नीतू दुबे का स्टॉल है। नीतू दुबे की विशेषज्ञता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे मात्र 5 मिनट में किसी भी व्यक्ति का लाइव स्केच तैयार कर दे रही हैं।उनकी इस अद्भुत कला को देखने और अपना पोर्ट्रेट बनवाने के लिए युवाओं और साहित्यकारों की लंबी कतार देखी जा रही है। नीतू की कला में बारीकियों का ऐसा समावेश है कि स्केच बिल्कुल वास्तविक प्रतीत होते हैं।
साहित्य, कला और संस्कृति का अनूठा संगम
गोपाल मैदान का पूरा माहौल कलात्मक ऊर्जा से सराबोर है। साहित्य उत्सव के आयोजकों का उद्देश्य शहर के लोगों को केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि कला के विभिन्न स्वरूपों जैसे पेंटिंग, लाइव आर्ट और मूर्तिकला से भी जोड़ना है। उत्सव में आए लोगों का कहना है कि जमशेदपुर में इस तरह का आयोजन शहर की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करेगा।
